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नज़्म
अफ़यूँ का दौर भी है मय-ए-अर्ग़वाँ के बाद
जाम-ए-सिफ़ाल हाथ में है जाम-ए-जम के साथ
इस्मतुल्लाह इस्मत बेग
नज़्म
बिर्ज लाल रअना
नज़्म
जो साए दूर चराग़ों के गिर्द लर्ज़ां हैं
न जाने महफ़िल-ए-ग़म है कि बज़्म-ए-जाम-ओ-सुबू
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
हो अगर हाथों में तेरे ख़ामा-ए-मोजिज़ रक़म
शीशा-ए-दिल हो अगर तेरा मिसाल-ए-जाम-ए-जम
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
बज़्म-ए-अंजुम की हर एक तनवीर धुँदली हो गई
रख दिया नाहीद ने झुँझला के हाथों से सितार
इब्न-ए-सफ़ी
नज़्म
साजिदा ज़ैदी
नज़्म
या'नी हम भी दस्त-ए-क़ुदरत में मिसाल-ए-जाम हैं
और गिरफ़्तार-ए-बला-ए-गर्दिश-ए-अय्याम हैं
अमजद नजमी
नज़्म
ये कार-ज़ार-ए-हस्ती है रंज-ओ-ग़म की बस्ती
फिर याद-ए-बज़्म-ए-जम में इक जाम-ए-जम पिला दे
ख़ुशी मोहम्मद नाज़िर
नज़्म
अभी तलक तो हुआ ज़िक्र-ए-जाम-ओ-बादा-ए-नाब
अब आदमी के दिल-ए-ख़ूँ-चकाँ की बात करें
मंशाउर्रहमान ख़ाँ मंशा
नज़्म
पर्दा-ए-हर-लफ़्ज़ में पोशीदा मा'नी का शुऊ'र
बे-नियाज़-ए-जाम-ओ-साग़र एक रूहानी सुरूर
ज़फ़र अहमद सिद्दीक़ी
नज़्म
पुतलियाँ दोनों तिरी आँखों में दो नीलम लगे
और तिरी आँखों का पानी मुझ को जाम-ए-जम लगे
जय राज सिंह झाला
नज़्म
तिरे दीवाँ को जाम-ए-जम समझते हैं जहाँ वाले
कहीं आँसू कहीं नग़्मे कहीं जल्वे जवानी के