आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "bazm-e-rindaa.n"
नज़्म के संबंधित परिणाम "bazm-e-rindaa.n"
नज़्म
बज़्म-ए-अंजुम की हर एक तनवीर धुँदली हो गई
रख दिया नाहीद ने झुँझला के हाथों से सितार
इब्न-ए-सफ़ी
नज़्म
दे साक़ी-ए-महवश कि नहीं ज़ब्त का यारा
महरूमी-ए-रिंदाँ तुझे क्यूँकर है गवारा
सयय्द महमूद हसन क़ैसर अमरोही
नज़्म
तो दिल ताब-ए-नशात-ए-बज़्म-ए-इशरत ला नहीं सकता
मैं चाहूँ भी तो ख़्वाब-आवर तराने गा नहीं सकता
साहिर लुधियानवी
नज़्म
यहाँ परहेज़ कैसा आओ रिंदान-ए-वतन आओ
कि जाम अपना है अपना मै-कदा पीर-ए-मुग़ाँ अपना
राम लाल वर्मा हिंदी
नज़्म
ये जा कर कोई बज़्म-ए-ख़ूबाँ में कह दो
कि अब दर-ख़ोर-ए-बज़्म-ए-ख़ूबाँ नहीं मैं
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
ये बज़्म-ए-ख़्वाब-ए-सरसय्यद ये नक़्श-ए-अज़्मत-ए-रफ़्ता
मय-ए-ईसार से लबरेज़ है इक जाम-ए-नूरानी
मोहम्मद सादिक़ ज़िया
नज़्म
जो साए दूर चराग़ों के गिर्द लर्ज़ां हैं
न जाने महफ़िल-ए-ग़म है कि बज़्म-ए-जाम-ओ-सुबू
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
ज़िंदगी को नागवार इक सानेहा जाने हुए
बज़्म-ए-किबर-ओ-नाज़ में फ़र्ज़ अपना पहचाने हुए
सीमाब अकबराबादी
नज़्म
बर्क़-ओ-आतिश से हुआ बर्बाद जिस का ख़ानुमाँ
अब वो आगाह-ए-नवेद-ए-बज़्म-ए-जाँ होने को है
फ़ज़लुर्रहमान
नज़्म
में क़सम खाता हूँ अपने नुत्क़ के ए'जाज़ की
तुम को बज़्म-ए-माह-ओ-अंजुम में बिठा सकता हूँ मैं