aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "be-aas"
जो सदियों केबेचैन बे-आस ख़्वाबों के बदले
न बे-आस लम्हों की सरगोशियाँ हैंकि नाज़ुक हरी बेल को
नाकामियों का माराबे-आस बे-सहारा
बेचैन हैं बे-ताब हैं बे-आस हैं बेकललहरा दे ज़रा आ के तू उम्मीद का आँचल
हवाओं में मिरी ख़ुशबू कभी महसूस करते होकभी बे आस हो कर फिर ज़मीं पर बैठ जाते हो
ये बात अजीब सुनाते हो वो दुनिया से बे-आस हुएइक नाम सुना और ग़श खाया इक ज़िक्र पे आप उदास हुए
उस को सब कुछ मिला जिस को वो मिल गएवो हैं बे-आस की आस निर्धन के धन
ऐसा भी नहीं कि मुझे ज़िंदगी के पेड़ के पासबे-आस और बे-सहारा छोड़ दिया गया हो
कौन है जो बे-आस है जीतागो कि बहुत बंदे हैं पुर-अरमाँ
बे-आब-ओ-गियाह बाँझ धरतीमुझ से ये सवाल कर रही है
बू-ए-बर्फ़
इश्क़ आबाद फ़ना-ए-कुल हैगुल का हासिल वही बू-ए-गुल है
बे-आब दरिया हो
ग़ुबार-ए-शाम के बे-अक्स मंज़र में हवा की साएँ साएँपंछियों को हाँकती है
बे-आब सिसकते मत छोड़ोसब नोच लो
बे-आब हो चुके हैंमैं जानती हूँ
उस बेद-ए-मजनूँ परनज़र पड़ती नहीं
ब-ईं-दलीलतुम्हारी तमीज़ तहज़ीब
बू-ए-मोहब्बत बू-ए-नफ़रतबू-ए-रिफ़ाक़त बू-ए-रक़ाबत
बे-आब-ओ-गियाह हर दिनख़ाक-ओ-ख़ून में लिथड़े
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