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नज़्म
नैना आदिल
नज़्म
इस का क़ुसूर क्या जो ख़फ़ा आप हो गए
कहते न थे न पूछिए 'बे-दिल' की आरज़ू
अब्दुल मन्नान बेदिल अज़ीमाबादी
नज़्म
कल के फ़नकार जिसे ज़ेर-ए-क़लम लाएँगे
'बे-दिल' उस रुख़ पे भी क़ब्ज़ा है 'मजीद-अमजद' का
बेदिल हैदरी
नज़्म
उसी कज-निगाही पे मरता है 'बे-दिल'
जो हर तीर-ए-मिज़्गाँ को तलवार कर दे
अब्दुल मन्नान बेदिल अज़ीमाबादी
नज़्म
अब उस के तज़्किरे हैं ज़माने में सुब्ह-ओ-शाम
उस रहबर-ए-‘अज़ीम को 'बे-दिल' मिरा सलाम
बेदिल हैदरी
नज़्म
अब्दुल मन्नान बेदिल अज़ीमाबादी
नज़्म
बेदिल हैदरी
नज़्म
आ कन्हैय्या कि तिरे वास्ते हम 'बिस्मिल' हैं
कहने सुनने के लिए दिल है मगर बे-दिल हैं