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नज़्म
ज़िंदगी राहत-ए-जाँ दर्द दिल-ए-ज़ार भी है
बाँझ खेती भी है और किश्त-ए-गुहर-बार भी है
ओम प्रकाश बजाज
नज़्म
अयाग़-ए-जिस्म-ओ-जाँ इक बे-ख़ुदी में जब लबा-लब था
चनारों के बदन में सुर्ख़-रू मस्ती दहकती थी
बिलाल अहमद
नज़्म
थी हर इक जुम्बिश निशान-ए-लुत्फ़-ए-जाँ मेरे लिए
हर्फ़-ए-बे-मतलब थी ख़ुद मेरी ज़बाँ मेरे लिए
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
साज़-ए-आहंग-ए-जुनूँ तार-ए-रग-ए-जाँ के लिए
बे-ख़ुदी शौक़ की बे-सर-ओ-सामाँ के लिए
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
दोनों हैं गर्म-ए-जिहाद फ़र्क़ इतना है मगर
एक को जाँ का ख़याल एक बे-परवा-ए-जाँ
मक़सूद अहमद मक़सूद
नज़्म
ऐ मिरे मुर्ग़े मिरे सर्माया-ए-तस्कीन-ए-जाँ
तेरी फ़ुर्क़त में है बे-रौनक़ मिरा सारा मकाँ
असद जाफ़री
नज़्म
फ़रहत-ए-दिल राहत-ए-जाँ ऐश-ए-पैहम के लिए
ईद आई बन के राहत सारे आलम के लिए