aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "be-ghar"
शाम होने को हैलाल सूरज समुंदर में खोने को है
कब तलक हम सहें ग़ासिबों के सितमऐ जहाँ देख ले कब से बे-घर हैं हम
बे-घर कर देना चाहते हो
ख़ुदा भी बे-घर हो गया थातुम
हम ने बे-घर देखा थाऔर कैसी है वो बच्ची
ख़ाक-बर-सर हुई ज़िंदगीकैसी बे-घर हुई ज़िंदगी
क़ाज़ी का पैग़ाम आएगाऔर मुझे बे-घर कर देगा
बे-घर है मगरहर घर में है
पहले बे-घर पत्ते नाच रहे हैंपूरब वालो देर न करना
सूखे फूलों की टहनी परपतझड़ के झोंकों से उड़ती बे-घर तितली
घोंसले बिखरे टूटे-फूटे हुएउन परिंदों के जो हैं अब बे-घर
उजड़ी ख़्वाब-ओ-ख़याल की दुनियाअपने घरों में सब हैं बे-घर
ओस में तर कोई बे-घर तितलीनींद-पेड़ की ख़्वाब-शाख़ पर
कि चेहरों से अटी दुनिया में तन्हा साँस लेतीहाँफती रातों के बे-घर हम-सफ़र
कम-सिनी में गाल पिचके रुख़ गुल-ए-पामाल साघर से बे-घर है जो बच्चा भूक से बेहाल सा
मगर होती नहीं है शक्ल जिस के साथ जोड़ा जाएउन बे-घर सदाओं को
जलती दोपहरों में मेरे हाथों उजड़े हुए घोंसलों के बेहाल परिंदों कीचीख़ें फ़रियादें मेरी बे-घर शामों में कोहराम मचाती रहती हैं
वो बे-सम्त बे-मंज़र बे-घर हो गया हैलेकिन फिर कभी कभी उसे एहसास होता है
कितना बे-रिश्ता कितना बे-घर कितना बे-वतन कर दिया हैहमें हमारे बच्चों ने!!!
जो ऐवानों में रहते थे वो बे-घर हो गए सारेजो अपने वक़्त के क़ारूँ थे बे-ज़र हो गए सारे
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