aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "be-lams"
ये लोग लम्स के मेले से बे-ख़बर चुप-चापघरों की सम्त रवाँ हैं
सपेद फूल रात के स्याह पानियों सेआरज़ू की आबशार से
तुम्हारे चेहरे परसिर्फ़ दो आँखें मेरी आश्ना हैं
आश्नाई गईदिलरुबाई गई
आख़िरी रात थी वोमैं ने दिल से ये कहा
जो कोई भी जाँ-दार-ओ-बे-जान मख़्लूक़ के लम्स सेआश्ना तक नहीं हो
दर्द की एक बे-कराँ रुत हैहब्स मौसम का राज हर जानिब
दफ़्तर से चुराया हुआ निस्फ़ दिनदोस्तों से बचाई हुई एक शाम
अब कभी अचानक सामना होता हैतो खनकती महकती
मैं ने तो इक वहशी सेप्यार की आस लगाई है
विसाल-रुत की ये पहली दस्तक ही सरज़निश हैकि हिज्र-मौसम ने रस्ते रस्ते सफ़र का आग़ाज़ कर दिया है
ख़ामोशी के जौहड़ मेंखिलने वाले फूल
हमारी लाडली नाज़ुक सी गुड़ियाबहुत प्यारी सी वो छोटी सी चिड़िया
वो इक बे-जान बादल हैउसे उड़ना तो आता है
फूल क़ुर्बत से पहलेमैं
उम्र का सूरज सिवा नेज़े पे आयागर्म शिरयानों में बहते ख़ून का दरिया भँवर होने लगा
धीरे धीरे बहने वालीएक सलोनी शाम अजब थी
बे-किवाड़ दरवाज़ेराह देखते होंगे
दरीचे बाज़ थेठंडी हवा की नर्म दस्तक से
तुम्हारी क़ुर्बत में बीता वक़्फ़ाख़ुमार बन कर मिरे तनफ़्फ़ुस में बे-तहाशा महक रहा है
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