aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "be-sadaa"
जो न टूटे कभी जो न हो बे-सदाजैसी उल्फ़त तिरी जैसी मेरी वफ़ा
फ़राएज़ से सदा अपने रहा तू बे-ख़बर लेकिनकभी छोड़ी न तू ने कस्र हक़ अपना जताने में
हिज्र के बे-सदा जज़ीरे परकुंज-ए-तन्हाई में कोई लड़की
मिरा दर्द नग़मा-ए-बे-सदामिरी ज़ात ज़र्रा-ए-बे-निशाँ
ख़फ़ा हैं लफ़्ज़लहजे बे-सदा हैं
मैं अक़ीदा हूँतू बे-सदा लफ़्ज़ है
घूम रहा है परवानाचकराया बे-सदा हो के गिरा
अचानक इक शबीहबे-सदा सी जस्त भर के
अपने ज़ख़्मों पे फैलाऊँ मैं कब तलकबे-सदा ख़्वाहिशों की सुलगती क़बा
बे-सदा हो गईंजब दरख़्तों से लटके हुए
फ़क़त एक शब बे-सदा जागती हैशब-ए-बे-सदा पूछती है
बे-सदा उदासी मेंबर्ग-ओ-शाख़ भी चुप चुप
एक धीमी सी गरज अल्हड़ घटा उठती हुईसाज़ के सीने से सौत-ए-बे-सदा उठती हुई
तो उन बे-सदा पैकरों नेनिहाँ ख़ाना-ए-आरज़ू के
सर्द ओ संगीन अज़्मत के पैकरआँखें बे-नूर, लब बे-सदा, हाथ बे-जान
बे-सदा सदियों के चूने से चुनी दीवारेंजो कि माज़ी भी हैं मुस्तक़बिल भी
खुले हुए हैं किसी दर्द-आश्ना के लिएतरस रहे हैं किसी जश्न-ए-बे-सदा के लिए
क़हक़हे बे-सदा क़हक़हेमकड़ियों की फ़ज़ा में उड़ाते रहे
यहाँ हर नफ़स बे-सदा हैयहाँ हर घड़ी अब सिसकती सी ज़ंजीर
तुम्हारी मा'ज़रत का कोई भी अंदाज़मेरी बे-सदा होती हुई धड़कन को
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