aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "bikheraa"
इसे बिखेरा तो दश्त-ओ-दमन में बिखरेगीबजाए-मुश्क-ए-सबा मेरी जान-ए-ज़ार की धूल
कभी शीशा समझते होजो आँधी ने बिखेरा हो
उन को बिखेरा उन को उड़ायादस्त-ए-ख़िज़ाँ ने मौज-ए-सबा ने
जिस ने आँखों में सितारे से कभी घोले थेआज एहसास पे काजल सा बिखेरा उस ने
गरमाए तहज़ीब की महफ़िल चमकाया अफ़्साने कोरंग बिखेरा आँचल आँचल रूप का मान बढ़ाने को
नई ज़िंदगी की नई ख़्वाहिशों नेग़मों को समेटा ख़ुशी को बिखेरा
गेंद घुसी इस्टम्प बिखेरा गिल्ली छिटकी दूरएक बड़ा स्कोर का सपना हो गया आख़िर चूर
चील कव्वों ने मगर लाश के टुकड़े कर केहर तरफ़ कूचा-ए-जानाँ में बिखेरा होगा
हवा ने एक सब्ज़ दरख़्त को बिखेरामिट्टी की ख़ुशबू ने बाँहें फैला कर
और इक फ़नकार की नख़वत से बालों को बिखेराऔर चेहरे को बनावट दी
फूल की पत्तियों की तरहयूँ बिखेरा
तमन्नाओं की जागती दास्तानें बिखेरा करेगीये आवाज़ तारीख़ की बे-रिया वादियों से
चमक उठे हैं सलासिल तो हम ने जाना हैकि अब सहर तिरे रुख़ पर बिखर गई होगी
हर तरफ़ बिखरी हुई रंगीनियाँ रानाइयाँहर क़दम पर इशरतें लेती हुई अंगड़ाइयाँ
कुछ बिखरे तिनके चिलमन केकुछ पुर्ज़े अपने दामन के
जो मिट्टी के सकोरों की तरह बिखरी पड़ी हैंगिलासों ने उन्हें मतरूक कर डाला
ये लब हैं तुम्हारे कि खिलता चमन हैबिखेरो जो ज़ुल्फ़ें तो शरमाए बादल
गेसू-ए-पुर-ख़म सवाद-ए-दोश तक पहुँचे हुएऔर कुछ बिखरे हुए उलझे हुए सिमटे हुए
तसव्वुरात की परछाइयाँ उभरती हैंमिरे पलंग पे बिखरी हुई किताबों को
कुछ धूल है बिखरी यादों कीकुछ गर्द-आलूद से मौसम हैं
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