aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "bikhraav"
ज़िंदगी इक दूर तक संगीत थी अब शोर हैहाँ मगर इस शोर के बिखराव में
चमक उठे हैं सलासिल तो हम ने जाना हैकि अब सहर तिरे रुख़ पर बिखर गई होगी
हर तरफ़ बिखरी हुई रंगीनियाँ रानाइयाँहर क़दम पर इशरतें लेती हुई अंगड़ाइयाँ
कुछ बिखरे तिनके चिलमन केकुछ पुर्ज़े अपने दामन के
जो मिट्टी के सकोरों की तरह बिखरी पड़ी हैंगिलासों ने उन्हें मतरूक कर डाला
गेसू-ए-पुर-ख़म सवाद-ए-दोश तक पहुँचे हुएऔर कुछ बिखरे हुए उलझे हुए सिमटे हुए
तसव्वुरात की परछाइयाँ उभरती हैंमिरे पलंग पे बिखरी हुई किताबों को
कुछ धूल है बिखरी यादों कीकुछ गर्द-आलूद से मौसम हैं
वो क़ुर्बतें वो जुदाइयाँ सबग़ुबार बन कर बिखर गई हैं
देखना ये है कि कल तुझ से मुलाक़ात के ब'अदरंग-ए-उम्मीद खिलेगा कि बिखर जाएगा
तो जान लेना कि हर पतंगे के साथ मैं भी बिखर चुका हूँतुम अपने हाथों से उन पतंगों की ख़ाक दरिया में डाल देना
उठाए कुछ वरक़ लाले ने कुछ नर्गिस ने कुछ गुल नेचमन में हर तरफ़ बिखरी हुई है दास्ताँ मेरी
ये कितने फूल टूट कर बिखर गए ये क्या हुआये कितने फूल शाख़चों पे मर गए ये क्या हुआ
ज़रा ये सर-कशी कम कर लें अपनी हद में ठहरेंउभरना फिर बिखरना और बिखर कर फिर उभरना
शहर के गोशों में हैं बिखरे हुएपा-शिकस्ता सर-बुरीदा ख़्वाब
नज़रें नीची किए शरमाए हुए आएगाकाकुलें चेहरे पे बिखराए हुए आएगा
नादीदा जज़ीरों की ज़मीं परइस तरह बिखरे पड़े हैं
बिखर गई हैतिरे ज़माने की चाहतीं
महकता हैबिखर जाता है
सलाम लिखता है शाएर तुम्हारे हुस्न के नामबिखर गया जो कभी रंग-ए-पैरहन सर-ए-बाम
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books