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नज़्म
प्यारे बुज़ुर्गो पता है ख़ुदा ने तुम्हें क्यूँ बनाया है
इस लिए कि तुम काट सको जो तुम ने बोया था
मोहम्मद हनीफ़ रामे
नज़्म
इक नगीना हो नए अल्फ़ाज़ का नए औज़ान का
सोते कँवल को थाम लेना और बोना तुख़्म उस में
अज़ीज़ प्रीहार
नज़्म
आ कि वाबस्ता हैं उस हुस्न की यादें तुझ से
जिस ने इस दिल को परी-ख़ाना बना रक्खा था
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
किसी तन्नूर के हैज़म की ख़ाकिस्तर ही बनना था
उसे शोला-ज़दा बूदश का इक बिस्तर ही बनना था
जौन एलिया
नज़्म
सुनो तन्हा चलना खेल नहीं, चलो आओ मिरे हम-राह चलो
चलो नए सफ़र पर चलते हैं, चलो मुझे बना के गवाह चलो
साक़ी फ़ारुक़ी
नज़्म
बराहीमी नज़र पैदा मगर मुश्किल से होती है
हवस छुप छुप के सीनों में बना लेती है तस्वीरें
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
या छोड़ें या तकमील करें ये इश्क़ है या अफ़साना है
ये कैसा गोरख-धंदा है ये कैसा ताना-बाना है