आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "botaa"
नज़्म के संबंधित परिणाम "botaa"
नज़्म
मैं ने अब तक किसी कोख वीरानी का हाल लिक्खा नहीं
क्यूँ ये वहशी क़लम मेरे विज्दान में नज़्म बोता नहीं
इंजील सहीफ़ा
नज़्म
अपनी वो धरती सारे जहाँ में फिर न कहीं पहचान मिली
इस मिट्टी की ख़ुशबू पाने बीज अश्कों के बोता था
शहाब जाफ़री
नज़्म
जब चाँद निकल कर बादल से आँखों में सपना बोता है
इक ख़्वाहिश की तन्हाई से बेदार जुनूँ जब होता है