aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "chaabuk"
जब मर्ग फिरा कर चाबुक को ये बैल बदन का हाँकेगाकोई नाज समेटेगा तेरा कोई गौन सिए और टाँकेगा
वो कूज़े मेरे दस्त-ए-चाबुक के पुतलेगिल-ओ-रंग-ओ-रोग़न की मख़्लूक़-ए-बे-जाँ
तिरे दर के आगे मुझे खींच लाईमगर तू यहाँ चाक पर अपनी धुन में मगन है निगाहें उठा
क्या नफ़ासत से चाबुक मारते हैं हुक्काममज़ा आ रहा है कहते हैं अवाम
बाहर नज़र आने लगेगाऔर वो चाबुक चलाते कोचवानों के दिखाए
तिरे दर के आगे मुझे खींच लाईमगर तू यहाँ चाक पर अपनी धुन में मगन है
और अपनी भूक और अपनी प्यास सेएक चाबुक
बिखरने लगे हैंज़मीनों पे अहकाम के लम्बे चाबुक से
तुझे हर क़दम पर मिलें मंज़िलेंहवा एक बारीक से तेज़ चाबुक की सूरत
तुझे हर क़दम पर मिलें मंज़िलेंहवा के एक बारीक से तेज़ चाबुक की सूरत
चाबुक न खाईमुँह भी न मोड़ा
घोड़ेजिन्हों ने लाख चाबुक सह कर भी
मेरा घोड़ाचाबुक के रक़्स का मुंतज़िर है
शिकस्ता-पाँव की चाबुक बनाईऔर गया ऐसा कि फिर उस ने पलट कर भी नहीं देखा
एक नंगी चीख़ती आवाज़फिर चाबुक का शोर
नताएज हैं जो तजरबे दूसरों केमिरी पीठ पर लाद कर लोग चाबुक को
चाबुक को लहराए तोमुझ से सरज़द हुई
लम्हों की पीठ पे चाबुक मारोहरकत की कोई सबील
कोई भी रुत हो उस की छबफ़ज़ा का रंग-रूप थी
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