aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "chal-chal"
छल छल करतीधारा पानी कीज़ह्न को जैसेआईना दिखाएदम दम बढ़तीजीवन धारा काभरम बताएपर वक़्त जैसाशीतल जल भीमुट्ठी में सेछिन जाता हैख़ाली मुट्ठीभीगी भीगीयाद दिलाएशीतल जल कीआस-पाससब ठहरा ठहरा हैजैसे धाराजम सी गई होजीवन जैसेथम सा गया होइस ठहरे ठहरेगदले पानी मेंख़ौफ़ की काली काली मछलीसब जैसेमेरी ही ताक मेंमुर्दा बनी होंऔर मैंइन को ज़िंदा करने कोअनजाने मेंसब को ख़ुश करने कोअपना आपकैसे गँवा दूँजमी धारा केगदले पानी मेंअपना अक्सकैसे डुबो दूँ
चल चल सहेली बाग़ मेंअमरूद लाएँगेचादर बिछाएँगेचादर का कोना फट गयादर्ज़ी बुलाएँगेदर्ज़ी की सोई टूट गईलुहार लाएँगेलोहे का हथौड़ा टूट गयामौजें उड़ाएँगेधूमें मचाएँगेछुट्टी मनाएँगेचल चल सहेली बाग़ में
हवा-ए-ख़ुश-गुमानी काफ़रहत-अंगेज़ झोंकामुझ से सरगोशी में कहता हैतुम्हें उस से मोहब्बत हैउसे तुम से मोहब्बत हैन तुम इज़हार करते होन वो इक़रार करती हैये सच हैफिर भी तुम दोनों ही अपनी ज़ात से इंकार करतेकही हर बात से इंकार करते होज़रा अपने दिलों से पूछ कर देखोकहीं ऐसा न हो ये वक़्त हाथों से निकल जाएज़माना चाल चल जाए
मैं इन सवालों से जाने कब से उलझ रहा हूँमिरे मुख़ालिफ़ ने चाल चल दी हैऔर अब मेरी चाल के इंतिज़ार में है
तपती राहों से चल चल केजब छाँव की ख़्वाहिश भी न रहीआशिक़ों की रवानी रोक तो लीक़तरा क़तरा उम्मीद बहाईये इश्क़ कहाँ ले जाएगाबे-ख़्वाब सवेरों की आवाज़पुर-नूर शबों को भूल गएअंदाज़-ए-बयाँ में उलझ गएशीरीं लबों को भूल गएये इश्क़ कहाँ ले जाएगासदियों की थकन से जीत के भीइक पल की निराशा सह न सकेसागर पीने का दा'वा हैदो अश्क बहे बिन रह न सकेये इश्क़ कहाँ ले जाएगाले गया जहाँ ले जाना थाकुछ ख़ास मज़े की जगह नहींजिस की ख़ातिर दिल को तोड़ेंमर जाएँ ये वो वज्ह नहींये इश्क़ कहाँ ले जाएगाहस्ती के और भी मुद्दआ' हैंहँसने के बहाने और भी हैंख़्वाहिश के दरीचे हैं हर सूऔर ग़म के फ़साने और भी हैंये इश्क़ कहाँ ले जाएगा
वो दिन शौक़-ए-परवाज़ में जबतिरे बाज़ुओं नेमिरी शाख़-ए-जाँ काट दी थीतिरे मरमरीं क़स्र के संग-ए-बुनियाद मेंमेरा ख़ूँ हैतिरे बा'द बरसोंतमाज़त में चल चल के मेरे क़दमथक गए हैंजभी यख़-कदे में भी तो बे-सुकूँ है
इक मौजूद मैंख़ौफ़ काबेहद रात समुंदरछल-छल छलकेना-मौजूद कीइक मौहूम सीरौशन मछलीफड़के उभरे डूबेएक ग़ुस्सैले सच काबे-रंग ताइरना-मालूम सेना-मालूम तलकअपने पर फैलाएसाएँ साएँउस पर झपटेनन्ही मछलीकब तक ख़ुद को बचाए
छक छक धुआँ उड़ातीकू कू कू कू सीटी बजाती
चले चले जाते हैं क़दमनज़रें मिलींरुक जाते हैं क़दममंज़िल ना दिखेमुड़ जाते हैं क़दममंज़िल जो दिखेजुड़ जाते हैं क़दमसफ़र करते पैहमथक जाते हैं क़दमकुछ नोकीला चुभ जाएरो जाते हैं क़दमउस के पास आने सेपीछे जाते हैं क़दमशर्म क्यों इतनीकर जाते हैं क़दमदेख बैठ यहाँ सेकहाँ जाते हैं क़दमवापस आते हैं याभटक जाते हैं क़दमग़लत बहुत ग़ुस्से मेंउठ जाते हैं क़दममिले जो सुर-ओ-तालबहल जाते हैं क़दमवक़्त से तेज़जाए जाते हैं क़दमवक़्त जो आएमर जाते हैं क़दम
चम-चम चीतेकाफ़ी पीते
एक सुब्ह मैं बेदार हुआ तो ख़ुदा ग़ाएब थाये बेहद तशवीश की बात थीमुझे उस की तलाश में निकलना पड़ाबस्ती में उस का निशान नहीं मिलामैं ने एक खोजी से राब्ता कियाउस ने खरा देख कर बतायाख़ुदा को बुरदा-फ़रोशों ने इग़वा कर लिया हैमैं ने पुलीस से राब्ता कियाथानेदार ने ख़ुदा की रिपोर्ट दर्ज करने से इंकार कर दियामैं अदालत में पेश हुआक़ाज़ी ने ख़ुदा का मुक़द्दमा सुनने से इंकार कर दियामैं ने दरबार में हाज़िरी दीहाकिम ने ख़ुदा का ज़िक्र सुनने से इंकार कर दियाचल चल कर मैं रास्ता भूल गयाभटकते भटकते एक बेगार कैम्प जा पहुँचावहाँ रंग-बिरंगी टोपियों वाले इग़वा-कारों की महफ़िल जमी थीख़ुदा भी मौजूद थाउस के पैरों में बेड़ियाँ पड़ी थींलेकिन हाथ खुले हुए थेजिन से वोइग़वा-कारों के मुतालबे परजन्नत के बाग़ों और जहन्नुम के तन्दूरों के मालिकाना हुक़ूक़ की फ़ाइलों परबे-तकान दस्तख़त किए जा रहा था
उट्ठो क़दम क़दम से मिलाते चले चलोसब मिल के एक राह बनाते चले चलोमंज़िल की धुन में झूमते गाते चले चलोहर मरहले को सहल बनाते चले चलोबन कर घटा फ़ज़ाओं पे छाते चले चलोहर हर क़दम पे धूम मचाते चले चलोतफ़रीक़-ए-रंग-ओ-नस्ल मिटाते चले चलोइंसानियत की शान दिखाते चले चलोआगे बढ़ो रुको न किसी रहगुज़ार परहर दम सफ़र का लुत्फ़ उठाते चले चलोमायूसियों में छेड़ दो नग़्मे उमीद केतारीकियों में जोत जगाते चले चलोटूटे हुए दिलों को मोहब्बत से जोड़ दोजौहर अमल के अपने दिखाते चले चलोधरती भी जगमगा उठे आकास की तरहरातों में वो चराग़ जलाते चले चलोचमको गगन के तारों की सूरत ज़मीन परतुम आसमाँ ज़मीं को बनाते चले चलोपतझड़ की रुत में फूल खिलाना कमाल हैपतझड़ की रुत में फूल खिलाते चले चलोबदले ख़िज़ाँ 'नज़ीर' चमन में बहार सेवो गीत ज़िंदगी के सुनाते चले चलो
ये छन-छन की आवाज़जो तुम सुन रहे होमेरी पायल की नहीं हैये आवाज़ हैउन मासूम सपनों कीजो हक़ीक़त के फ़र्श परहर पलघुंघरुओं की मानिंद टूट करबिखर रहे हैं
छम-छमा-छम छमम छम-छमा-छम छममकाँच की चूड़ियाँ छम-छमा-छम छमम
रेलवे लाइन परमोर सो रहा हैतेज़ रफ़्तार ट्रेनयहाँ से मत गुज़रोलाइन-मैन से कहोकाँटा बदल देतुम्हारा रास्ता तब्दील हो जाएगाया फिर एक सुर्ख़ लालटैनरेलवे लाइन के साथ रख देकिसी न किसी तरहतुम्हें रोक लेरेलवे लाइन पर मोर सो रहा हैउसे इस के ख़्वाब से बाहर मत निकालोवो अपने ख़्वाब मेंकिसी नए बादशाह की तरहपहली बार गर्दन उठा के चल चल रहा हैउस की सल्तनतउस के परों की तरह रंगों से भरीऔर खुली हुई हैउसे बे-रंग मत करोउसे मत उजाड़ोउस की बादशाहत का ख़ात्माइतनी जल्दी मत करोअगर हमारे आँसुओं कीकोई क़ीमत नहीं हैतब भी हमारे सारे आँसूहमेशा के लिए अपने पास रख लोहमारे मोर की नींदउस की बेश-क़ीमत नींदउस के परों की यकजाईहमारे कितनी अहम हैतुम्हें नहीं मा'लूमतेज़ रफ़्तार ट्रेनये सब कुछ हम से मत छीनोरेलवे लाइन पर मोर को सोने दोवो हमेशा सोया नहीं रहेगारात भर के लिए उसे सोने दोअगर तुम ने उस के परों कोबिखेर दियातो हमारी ज़िंदगी में लोगोंऔर चीज़ों की तरतीबख़त्म हो जाएगीहमारी आँखों में मौजूदमोहब्बत की आख़िरी चमक ख़त्म हो जाएगीहमारे दिलों से रंग उड़ जाएँगेरेलवे लाइन परउस के परों को मत बिखेरोवर्ना जो भी उन्हें उठाएगाइस की उँगलियों में उम्र भरकाँटे चुभते रहेंगेइस की आँखों में हमेशासूइयाँ भरी रहेंगीये पर डाइरी में रखने केया लड़कियों के लिएपंखे बनाने के काम नहीं आतेअगर एक बार मोर के परया उस की नींद बिखर जाएतो हमें और तुम्हें तेज़ रफ़्तार ट्रेनकोई नहीं चलने देगाज़िंदा भी नहीं रहने देगारेलवे लाइन पर नहीं सोने देगा
तुम क्या जानोआवाज़ सफ़र करती हैदूर मंदिरों में बजती घंटियों की तरहजिस्म बोलते हैंदरिया की लहरें जब किनारों से टकराती हैंतलातुम-ख़ेज़ मौजों का अजब इक शोर उठता हैऔर उस पर पड़ती कमरों की रौशनीख़ाक दरिया में रूह फूँक देती हैतुम बच्चों को परियों चाँद सितारों की कहानियाँ सुनाते होबे-ख़बरये सभी तुम्हारे ख़िलाफ़ दोहरी चाल चल रहे हैंतुम क़दीम धुनों मेंपेश-ए-दोशीज़गी दोशीज़गी के रंग देते होऔर आराम तलब घटाओं से गुरेज़ाँ होजो तुम्हारे रस्ते में ख़ाली पड़े बेंचों पर मातम करती हैंकीट्स और कॉलरिज तुम्हारा क्या बिगाड़ेंगेअक़्ल-ओ-दानिश के पहरे-दार तुम्हारी हिफ़ाज़त कर रहे हैंतुम्हें ख़्वाब की तहवील में कैसे लाएँतुम और मोहब्बतअपनी आँखें सूरज की तरफ़ रखोशुक्र दोपहरसन्नाटों में दीवाना-वार उस की गली तलाश करोगेतुम इक दिन वहशत के हाथों मार दिए जाओगे
इस मौसम पानी आगे आएगा तुम घर में मत सोनाजब छत की खच्ची झुक जाएऔर पानी छल-छल दिखता होतब बाहर सोना अच्छा रहता हैफिर मौसम अपने मौसम हो जाते हैंऔर रुत कन्या पाज़ेब उतार के फेंकती हैफिर कोई किसी से ये नहीं कहतामौला मुझ को बादल कर देया सोती मिट्टीया चलता पानीफिर कोई किसी से कुछ नहीं कहताफिर सब अपनी सुनते हैंफिर बादल बारिश रात ज़मीं सब इक चादर में सोते हैंऔर इक चादर में चलते हैंऔर होते हैं और नहीं होते हैंऔर लफ़्ज़ का वाहिद सरमाया ख़ामोशी हैऔर जो लफ़्ज़ नहीं सुनते हैं ख़ामोशी भी नहीं सुनते हैंजब पहलू-दार सुतून से टेक लगाए लड़की सोती हैऔर हौज़ के पास खड़े शहज़ादेऔर उन की बांदियाँऔर सारा शहरइस आन कहीं चुपके से उन में हो जानाऔर नहीं कहना मैं आया हूँअच्छा हैआगाही और पछतावे और ऐसी मौत से जो यकसर ना-मा'लूम में है
इक-तारा बाजे छन छनजागो जागोहाँ सुनो सुनोये तान मगनये दिल धड़कनइक-तारा बाजे छन छन छनजागो जागोदाता ने तुझे धनवान कियाजीना तुझ पर आसान कियाजिस गली भी दुखिया रोएगाकब चैन से कोई सोएगानादार का जिस को ध्यान नहींवो पत्थर-दिल इंसान नहींदूजों के काम सँवार मियाँकुछ फ़र्ज़ का क़र्ज़ उतार मियाँजागो जागोहाँ सुनो सुनोये तान मगन ये दिल धड़कनइक-तारा बाजे छन छन छन
ज़माना कितना बदल गया हैमक़ाम रिश्तों का मिट रहा हैकहीं मोहब्बत का रूप धारेकहीं सुलगते ये नफ़रतों सेकहीं पे आँखों में रेत बन करचुभन की सूरत रुला रहे हैंकहीं ये बर्क़ी पयाम बन करहज़ार मीलों पे छाई दूरी के बादलों को हटा रहे हैंदिलों की धड़कन बढ़ा रहे हैंरिवायतों को बदल रहे हैंवफ़ा के धागे जफ़ा से हर दम उलझ रहे हैंउदास लम्हे ख़ुशी-ओ-हैरत की सारी घड़ियाँदिलों से बाहर निकल के दीवार का नविश्तामोहब्बत अज़ली अज़ीम रिश्ताजो लाखों पर्दों में जगमगाता थाअब स्टेटस पे इश्तिहा की ख़बर की सूरत बदल रहा हैकोई भी जज़्बा कोई भी रिश्तान मुस्तक़िल है न मो'तबर हैपलक झपकने में बदले मंज़रकि जैसे कोई जहान-ज़ादी तअ'ल्लुक़ अपना बदल रही होनई कोई चाल चल रही होजुनूँ की अगली जो मंज़िलें हैंवहाँ पे तस्वीरें आवेज़ाँ हैंदबी दबी मुस्कुराहटें हैंघुटी घुटी संसनाहटें हैंजुनून एहसास और मोहब्बतवक़ार अपना मिटा रही हैंबता रही हैंज़माना कितना बदल गया है
अम्न की मंज़िल के राही गीत गाता चलज़िंदगी के प्यार की मशअ'ल जलाता चलअज़्मतें तारीख़ की हैं रहनुमा तेरीबरकतें तहज़ीब की हैं हम-नवा तेरीहम-क़दम हैं अहल-ए-दिल नग़्मे सुनाता चलअम्न की मंज़िल के राही गीत गाता चलआदमी के भेस में शैतान आएँगेरास्ते में सैकड़ों तूफ़ान आएँगेतू मगर इन मुश्किलों पर मुस्कुराता चलअम्न की मंज़िल के राही गीत गाता चलक्यों ख़िज़ाँ आए भला गुलज़ार-ए-हस्ती मेंक्यों चलें ग़म की हवाएँ दिल की बस्ती मेंतू बहार-ए-शौक़ के ग़ुंचे खिलाता चलअम्न की मंज़िल के राही गीत गाता चल
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