aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "chalte"
आप को इल्म है वो आज नहीं आई हैं?मेरी हर दोस्त से उस ने यही पूछा होगाक्यूँ नहीं आई वो क्या बात हुई है आख़िरख़ुद से इस बात पे सौ बार वो उलझा होगाकल वो आएगी तो मैं उस से नहीं बोलूँगाआप ही आप कई बार वो रूठा होगावो नहीं है तो बुलंदी का सफ़र कितना कठिनसीढ़ियाँ चढ़ते हुए उस ने ये सोचा होगाराहदारी में हरे लॉन में फूलों के क़रीबउस ने हर सम्त मुझे आन के ढूँडा होगा
और दबे दबे लहजे में कहे तुम ने अब तक बड़े दर्द सहेतुम तन्हा तन्हा जलते रहे तुम तन्हा तन्हा चलते रहेसुनो तन्हा चलना खेल नहीं, चलो आओ मिरे हम-राह चलोचलो नए सफ़र पर चलते हैं, चलो मुझे बना के गवाह चलो
साँस लेना भी कैसी आदत हैजिए जाना भी क्या रिवायत हैकोई आहट नहीं बदन में कहींकोई साया नहीं है आँखों मेंपाँव बेहिस हैं चलते जाते हैंइक सफ़र है जो बहता रहता हैकितने बरसों से कितनी सदियों सेजिए जाते हैं जिए जाते हैं
जब चलते चलते रस्ते में ये गौन तिरी रह जावेगीइक बधिया तेरी मिट्टी पर फिर घास न चरने आवेगीये खेप जो तू ने लादी है सब हिस्सों में बट जावेगीधी पूत जँवाई बेटा क्या बंजारन पास न आवेगीसब ठाठ पड़ा रह जावेगा जब लाद चलेगा बंजारा
कटते भी चलो, बढ़ते भी चलो, बाज़ू भी बहुत हैं सर भी बहुतचलते भी चलो कि अब डेरे मंज़िल ही पे डाले जाएँगे
दुनिया में पादशह है सो है वो भी आदमीऔर मुफ़्लिस-ओ-गदा है सो है वो भी आदमीज़रदार-ए-बे-नवा है सो है वो भी आदमीनेमत जो खा रहा है सो है वो भी आदमीटुकड़े चबा रहा है सो है वो भी आदमीअब्दाल, क़ुतुब ओ ग़ौस वली-आदमी हुएमुंकिर भी आदमी हुए और कुफ़्र के भरेक्या क्या करिश्मे कश्फ़-ओ-करामात के लिएहत्ता कि अपने ज़ोहद-ओ-रियाज़त के ज़ोर सेख़ालिक़ से जा मिला है सो है वो भी आदमीफ़िरऔन ने किया था जो दावा ख़ुदाई काशद्दाद भी बहिश्त बना कर हुआ ख़ुदानमरूद भी ख़ुदा ही कहाता था बरमलाये बात है समझने की आगे कहूँ मैं क्यायाँ तक जो हो चुका है सो है वो भी आदमीकुल आदमी का हुस्न ओ क़ुबह में है याँ ज़ुहूरशैताँ भी आदमी है जो करता है मक्र-ओ-ज़ोरऔर हादी रहनुमा है सो है वो भी आदमीमस्जिद भी आदमी ने बनाई है याँ मियाँबनते हैं आदमी ही इमाम और ख़ुत्बा-ख़्वाँपढ़ते हैं आदमी ही क़ुरआन और नमाज़ियाँऔर आदमी ही उन की चुराते हैं जूतियाँजो उन को ताड़ता है सो है वो भी आदमीयाँ आदमी पे जान को वारे है आदमीऔर आदमी पे तेग़ को मारे है आदमीपगड़ी भी आदमी की उतारे है आदमीचिल्ला के आदमी को पुकारे है आदमीऔर सुन के दौड़ता है सो है वो भी आदमीचलता है आदमी ही मुसाफ़िर हो ले के मालऔर आदमी ही मारे है फाँसी गले में डालयाँ आदमी ही सैद है और आदमी ही जालसच्चा भी आदमी ही निकलता है मेरे लालऔर झूट का भरा है सो है वो भी आदमीयाँ आदमी ही शादी है और आदमी बियाहक़ाज़ी वकील आदमी और आदमी गवाहताशे बजाते आदमी चलते हैं ख़्वाह-मख़ाहदौड़े हैं आदमी ही तो मशअ'ल जला के राहऔर ब्याहने चढ़ा है सो है वो भी आदमीयाँ आदमी नक़ीब हो बोले है बार बारऔर आदमी ही प्यादे हैं और आदमी सवारहुक़्क़ा सुराही जूतियाँ दौड़ें बग़ल में मारकाँधे पे रख के पालकी हैं दौड़ते कहारऔर उस में जो पड़ा है सो है वो भी आदमीबैठे हैं आदमी ही दुकानें लगा लगाऔर आदमी ही फिरते हैं रख सर पे ख़ूनचाकहता है कोई लो कोई कहता है ला रे लाकिस किस तरह की बेचें हैं चीज़ें बना बनाऔर मोल ले रहा है सो है वो आदमीतबले मजीरे दाएरे सारंगियाँ बजागाते हैं आदमी ही हर इक तरह जा-ब-जारंडी भी आदमी ही नचाते हैं गत लगाऔर आदमी ही नाचे हैं और देख फिर मज़ाजो नाच देखता है सो है वो भी आदमीयाँ आदमी ही लाल-ओ-जवाहर में बे-बहाऔर आदमी ही ख़ाक से बद-तर है हो गयाकाला भी आदमी है कि उल्टा है जूँ तवागोरा भी आदमी है कि टुकड़ा है चाँद-साबद-शक्ल बद-नुमा है सो है वो भी आदमीइक आदमी हैं जिन के ये कुछ ज़र्क़-बर्क़ हैंरूपे के जिन के पाँव हैं सोने के फ़र्क़ हैंझमके तमाम ग़र्ब से ले ता-ब-शर्क़ हैंकम-ख़्वाब ताश शाल दो-शालों में ग़र्क़ हैंऔर चीथडों लगा है सो है वो भी आदमीहैराँ हूँ यारो देखो तो क्या ये स्वाँग हैऔर आदमी ही चोर है और आपी थांग हैहै छीना झपटी और बाँग ताँग हैदेखा तो आदमी ही यहाँ मिस्ल-ए-रांग हैफ़ौलाद से गढ़ा है सो है वो भी आदमीमरने में आदमी ही कफ़न करते हैं तयारनहला-धुला उठाते हैं काँधे पे कर सवारकलमा भी पढ़ते जाते हैं रोते हैं ज़ार-ज़ारसब आदमी ही करते हैं मुर्दे के कारोबारऔर वो जो मर गया है सो है वो भी आदमीअशराफ़ और कमीने से ले शाह-ता-वज़ीरये आदमी ही करते हैं सब कार-ए-दिल-पज़ीरयाँ आदमी मुरीद है और आदमी ही पीरअच्छा भी आदमी ही कहाता है ऐ 'नज़ीर'और सब में जो बुरा है सो है वो भी आदमी
दस करोड़ इंसानो!ज़िंदगी से बेगानो!सिर्फ़ चंद लोगों नेहक़ तुम्हारा छीना हैख़ाक ऐसे जीने परये भी कोई जीना हैबे-शुऊर भी तुम कोबे-शुऊर कहते हैंसोचता हूँ ये नादाँकिस हवा में रहते हैंऔर ये क़सीदा-गोफ़िक्र है यही जिन कोहाथ में अलम ले करतुम न उठ सको लोगोकब तलक ये ख़ामोशीचलते-फिरते ज़िंदानोदस करोड़ इंसानो!
ये आँसूशायद बहुत दिनों सेवहीं छुपा थाजिन्हों ने इस को जनम दिया थावो रंज तो मस्लहत के हाथोंन जाने कब क़त्ल हो गए थेतो करता फिर किस पे नाज़ आँसूकि हो गया बे-जवाज़ आँसूयतीम आँसू यसीर आँसून मो'तबर थान रास्तों से ही बा-ख़बर थातो चलते चलतेवो थम गया थाठिठक गया थाझिझक गया था
बल्ली-मारां के मोहल्ले की वो पेचीदा दलीलों की सी गलियाँसामने टाल की नुक्कड़ पे बटेरों के क़सीदेगुड़गुड़ाती हुई पान की पीकों में वो दाद वो वाह वाचंद दरवाज़ों पे लटके हुए बोसीदा से कुछ टाट के पर्देएक बकरी के मिम्याने की आवाज़और धुँदलाई हुई शाम के बे-नूर अँधेरे साएऐसे दीवारों से मुँह जोड़ के चलते हैं यहाँचूड़ी-वालान कै कटरे की बड़ी-बी जैसेअपनी बुझती हुई आँखों से दरवाज़े टटोले
बिसात-ए-ज़िंदगी तो हर घड़ी बिछती है उठती हैयहाँ पर जितने ख़ाने जितने घर हैंसारेख़ुशियाँ और ग़म इनआ'म करते हैंयहाँ पर सारे मोहरेअपनी अपनी चाल चलते हैंकभी महसूर होते हैं कभी आगे निकलते हैंयहाँ पर शह भी पड़ती हैयहाँ पर मात होती हैकभी इक चाल टलती हैकभी बाज़ी पलटती हैयहाँ पर सारे मोहरे अपनी अपनी चाल चलते हैंमगर मैं वो पियादा हूँजो हर घर मेंकभी इस शह से पहले और कभी उस मात से पहलेकभी इक बुर्द से पहले कभी आफ़ात से पहलेहमेशा क़त्ल हो जाता है
चंद क़दमों के निशाँ हाँ कभी मिलते हैं कहींसाथ चलते हैं जो कुछ दूर फ़क़त चंद क़दमऔर फिर टूट के गिर जाते हैं ये कहते हुएअपनी तन्हाई लिए आप चलो, तन्हा अकेलेसाथ आए जो यहाँ कोई नहीं, कोई नहीं
वो तो यूँ था कि हमअपनी अपनी ज़रूरत की ख़ातिरअपने अपने तक़ाज़ों को पूरा कियाअपने अपने इरादों की तकमील मेंतीरा-ओ-तार ख़्वाहिश की संगलाख़ राहों पे चलते रहेफिर भी राहों में कितने शगूफ़े खिलेवो तो यूँ था कि बढ़ते गए सिलसिलेवर्ना यूँ है कि हमअजनबी कल भी थेअजनबी अब भी हैंअब भी यूँ है कि तुमहर क़सम तोड़ दोसब ज़िदें छोड़ दोऔर अगर यूँ न था तो यूँही सोच लोतुम ने इक़रार ही कब किया था कि मैंतुम से मंसूब हूँमैं ने इसरार ही कब किया था कि तुमयाद आओ मुझेभूल जाओ मुझे
तुम बिल्कुल हम जैसे निकलेअब तक कहाँ छुपे थे भाईवो मूरखता वो घामड़-पनजिस में हम ने सदी गँवाईआख़िर पहुँची द्वार तुहारेअरे बधाई बहुत बधाईप्रेत धर्म का नाच रहा हैक़ाएम हिन्दू राज करोगेसारे उल्टे काज करोगेअपना चमन ताराज करोगेतुम भी बैठे करोगे सोचापूरी है वैसी तय्यारीकौन है हिन्दू कौन नहीं हैतुम भी करोगे फ़तवा जारीहोगा कठिन यहाँ भी जीनादाँतों आ जाएगा पसीनाजैसी-तैसी कटा करेगीयहाँ भी सब की साँस घुटेगीभाड़ में जाए शिक्षा-विक्षाअब जाहिल-पन के गन गानाआगे गढ़ा है ये मत देखोवापस लाओ गया ज़मानामश्क़ करो तुम आ जाएगाउल्टे पाँव चलते जानाध्यान न दूजा मन में आएबस पीछे ही नज़र जमानाएक जाप सा करते जाओबारम-बार यही दोहराओकैसा वीर महान था भारतकितना 'आली-शान था भारतफिर तुम लोग पहुँच जाओगेबस परलोक पहुँच जाओगेहम तो हैं पहले से वहाँ परतुम भी समय निकालते रहनाअब जिस नर्क में जाओ वहाँ सेचिट्ठी-विट्ठी डालते रहना
मेज़ पर फूल सजाते हुए देखा है कई बारऔर बिस्तर से कई बार जगाया भी है तुझ कोचलते-फिरते तिरे क़दमों की वो आहट भी सुनी है
ओ देस से आने वाले बताक्या अब भी वहाँ वैसी ही जवाँऔर मध-भरी रातें होती हैंक्या रात भर अब भी गीतों कीऔर प्यार की बातें होती हैंवो हुस्न के जादू चलते हैंवो इश्क़ की घातें होती हैंओ देस से आने वाले बता
याद की राहगुज़र जिस पे इसी सूरत सेमुद्दतें बीत गई हैं तुम्हें चलते चलतेख़त्म हो जाए जो दो चार क़दम और चलोमोड़ पड़ता है जहाँ दश्त-ए-फ़रामोशी काजिस से आगे न कोई मैं हूँ न कोई तुम होसाँस थामे हैं निगाहें कि न जाने किस दमतुम पलट आओ गुज़र जाओ या मुड़ कर देखोगरचे वाक़िफ़ हैं निगाहें कि ये सब धोका हैगर कहीं तुम से हम-आग़ोश हुई फिर से नज़रफूट निकलेगी वहाँ और कोई राहगुज़रफिर इसी तरह जहाँ होगा मुक़ाबिल पैहमसाया-ए-ज़ुल्फ़ का और जुम्बिश-ए-बाज़ू का सफ़र
आज मोहब्बत का जन्म-दिन हैआज हम उदासी की छुरी सेअपने दिल को काटेंगेआज हम अपनी पलकों परजलती हुई मोम-बत्ती रख केएक तार पर से गुज़़रेंगेहमें कोई नहीं देखेगामगर हम हर बंद खिड़की की तरफ़देखेंगेहर दरवाज़े के सामने फूल रखेंगेकिसी न किसी बात परहम रोएँगे और अपने रोने परहम हँसेंगेआज मोहब्बत का जन्म-दिन हैआज हम हर दरख़्त के सामने सेगुज़रते हुएटोपी उतार कर उसे सलाम करेंगेहर बादल को देख केहाथ हिलाएँगेहर सितारे का शुक्रिया अदा करेंगेहमारे आँसुओं नेहमारे हथेलियों को छलनी कर दिया हैआज हम अपने दोनों हाथजेबों में डाल कर चलेंगेऔर अगले बरस तक चलते रहेंगे
गाँव में फिर इक मेला आयाबूढ़े बाप ने काँपते हाथों सेबेटे की बाँह को थामाऔर बेटे नेये क्या है और वो क्या हैजितना भी बन पायासमझायाबाप ने बेटे के कंधे पर सर रक्खाबेटे ने पूछानींद आती हैबाप ने मुड़ केयाद की पगडंडी पर चलतेबीते हुएसब अच्छे बुरेऔर कड़वे मीठेलम्हों के पैरों से उड़तीधूल को देखाफिरअपने बेटे को देखाहोंटों परइक हल्की सी मुस्कान आईहौले से बोलाहाँ!मुझ को अब नींद आती है
उस ने इतनी किताबें चाट डालींकि उस की औरत के पैर काग़ज़ की तरह हो गएवो रोज़ काग़ज़ पे अपना चेहरा लिखता और गंदा होताउस की औरत जो ख़ामोशी काढ़े बैठी थीकाग़ज़ों के भूँकने पर सारतर के पास गईतुम रैम्बो और फ़्राइड से भी मिल आए हो क्यासैफ़ू मेरी सैफ़ू मीराबाई की तरह मत बोलोमैं समझ गई अब उस की आँखेंकीट्स की आँखें हुई जाती हैंमैं जो सोहनी का घड़ा उठाए हुए थीअपना नाम लैला बता चुकी थीमैं ने कहालैला मजमे की बातें मेरे सामने मत दोहराया करोतन्हाई भी कोई चीज़ होती हैशेक्सपियर के ड्रामों से चुन चुन कर उस ने ठुमके लगाएमुझे तन्हा देख करसारतर फ़्राइड के कमरे में चला गयावो अपनी थ्योरी से गिर गिर पड़तामैं समझ गई उस की किताब कितनी हैलेकिन बहर हाल सारतर थाऔर कल को मजमे में भी मिलना थामैं ने भीड़ की तरफ़ इशारा किया तो बोलाइतने सारे सार्त्रों से मिल कर तुम्हें क्या करना हैअगर ज़ियादा ज़िद करती हो तो अपने वारिस 'शाह'हीर सय्याल के कमरों में चले चलते हैंसारतर से इस्तिआरा मिलते हीमैं ने एक तन्क़ीदी नशिस्त रक्खीमैं ने आधा कमरा भी बड़ी मुश्किल से हासिल किया थासो पहले आधे फ़्राइड को बुलायाफिर आधे रैम्बो को बुलायाआधी आधी बात पूछनी शुरूअ कीजॉन डन क्या कर रहा हैसैकेंड हैंड शाइरों से नजात चाहता हैचोरों से सख़्त नालाँ हैदाँते इस वक़्त कहाँ हैवो जहन्नम से भी फ़रार हो चुका हैउस को शुबहा थावो ख़्वाजा-सराओं से ज़ियादा देर मुक़ाबला नहीं कर सकताअपने पस-मंज़र मेंएक कुत्ता मुसलसल भूँकने के लिए छोड़ गया हैइस कुत्ते की ख़सलत क्या हैबियातर्चे की याद में भूँक रहा हैतुम्हारा तसव्वुर क्या कहता हैसार्त्रों की तसव्वुर के लिहाज़ सेअब उस का रुख़ गोएटे के घर की तरफ़ हो गया है
इस भरे शहर में कोई ऐसा नहींजो मुझे राह चलते को पहचान लेऔर आवाज़ दे ओ बे ओ सर-फिरेदोनों इक दूसरे से लिपट कर वहींगिर्द-ओ-पेश और माहौल को भूल करगालियाँ दें हँसें हाथा-पाई करेंपास के पेड़ की छाँव में बैठ करघंटों इक दूसरे की सुनें और कहेंऔर इस नेक रूहों के बाज़ार मेंमेरी ये क़ीमती बे-बहा ज़िंदगीएक दिन के लिए अपना रुख़ मोड़ ले
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