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नज़्म
मैं चराग़-ए-सर-ए-मंज़िल हूँ मुझे जलने दे
मेरी ख़ातिर तू न कर ऐश-ए-बहाराँ से गुरेज़
सादिक़ नक़वी
नज़्म
हौसला-ए-राह-ए-अदम है कि नहीं है
फिर बर्क़ फ़रोज़ाँ है सर-ए-वादी-ए-सीना, ऐ दीदा-ए-बीना
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
वो लब जो हर्फ़-ए-सर-ए-दार का मुग़न्नी था
जो नग़्मा-ख़्वाँ सर-ए-मक़्तल रहा उजालों का
मुस्लिम शमीम
नज़्म
क़ुमरियाँ मीठे सुरों के साज़ ले कर आ गईं
बुलबुलें मिल-जुल के आज़ादी के गुन गाने लगीं
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
जिस में जुज़ सनअत-ए-ख़ून-ए-सर-ए-पा कुछ भी न था
दिल को ताबीर कोई और गवारा ही न थी