aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "chhake"
आख़िरी बार मिलो ऐसे कि जलते हुए दिलराख हो जाएँ कोई और तक़ाज़ा न करेंचाक-ए-वादा न सिले ज़ख़्म-ए-तमन्ना न खिलेसाँस हमवार रहे शम्अ की लौ तक न हिलेबातें बस इतनी कि लम्हे उन्हें आ कर गिन जाएँआँख उठाए कोई उम्मीद तो आँखें छिन जाएँ
दस्त-ए-जुनूँ को रोकिए ये ख़ब्त छोड़िएरुस्वा है यूँही चाक-ए-गरेबान-ए-लखनऊ
जिगर-दरीदा हूँ चाक-ए-जिगर की बात सुनोअलम-रसीदा हूँ दामान-ए-तर की बात सुनोज़बाँ-बुरीदा हूँ ज़ख़्म-ए-गुलू से हर्फ़ करोशिकस्ता-पा हूँ मलाल-ए-सफ़र की बात सुनोमुसाफ़िर-ए-रह-ए-सहरा-ए-ज़ुल्मत-ए-शब सेअब इल्तिफ़ात-ए-निगार-ए-सहर की बात सुनोसहर की बात उमीद-ए-सहर की बात सुनो
इस तरह है कि हर इक पेड़ कोई मंदिर हैकोई उजड़ा हुआ, बे-नूर पुराना मंदिरढूँढता है जो ख़राबी के बहाने कब सेचाक-ए-हर-बाम हर इक दर का दम-ए-आख़िर हैआसमाँ कोई पुरोहित है जो हर बाम-तलेजिस्म पर राख मले माथे पे सिन्दूर मलेसर-निगूँ बैठा है चुप-चाप न जाने कब सेइस तरह है कि पस-ए-पर्दा कोई साहिर हैजिस ने आफ़ाक़ पे फैलाया है यूँ सेहर का दामदामन-ए-वक़्त से पैवस्त है यूँ दामन-ए-शामअब कभी शाम बुझेगी न अँधेरा होगाअब कभी रात ढलेगी न सवेरा होगा
ग़ायत-ए-सूद-ओ-ज़ियाँ सूरत-ए-आगाज़-ओ-मआलवही बे-सूद-ए-तजस्सुस वही बेकार सवालमुज़्महिल साअत-ए-इमरोज़ की बे-रंगी सेयाद-ए-माज़ी से ग़मीं दहशत-ए-फ़र्दा से निढालतिश्ना अफ़्कार जो तस्कीन नहीं पाते हैंसोख़्ता अश्क जो आँखों में नहीं आते हैंइक कड़ा दर्द कि जो गीत में ढलता ही नहींदिल के तारीक शिगाफ़ों से निकलता ही नहींऔर उलझी हुई मौहूम सी दरबाँ की तलाशदश्त ओ ज़िंदाँ की हवस चाक-ए-गिरेबाँ की तलाश
किसी ने अतलस-ओ-कमख़्वाब की क़बा पहनीकिसी ने चाक-ए-गरेबाँ किसी ने ज़ख़्म सिए
पहले-पहल तो कहती हैं तुम हो मिरे बलमतुम मिल गए तो हो गए दुनिया के दूर ग़मतुम पर हज़ार जान से क़ुर्बान मैं सनमकुछ दिन के ब'अद कहती हैं शौहर को फिर ख़स्मपहले तो ख़ूब सर पे चढ़ाती हैं बीवियाँक़दमों में इस के ब'अद गिराती हैं बीवियाँ
मैं ने भी एक जोहद-ए-मुसलसल में काट दीवो उम्र थी जो फूल से अरमाँ लिए हुएअब वो जुनूँ रहा है न वो मौसम-ए-बहारबैठा हूँ अपना चाक-ए-गिरेबाँ सिए हुए
क्यूँ मिरी तल्ख़-नवाई से ख़फ़ा होते होज़हर ही मुझ को मिला ज़हर पिया है मैं नेकोई इस दश्त-ए-जुनूँ में मिरी वहशत देखेअपने ही चाक-ए-गरेबाँ को सिया है मैं ने
स्वराज का झंडा भारत में गड़वा दिया गाँधी बाबा नेदिल क़ौम-ओ-वतन के दुश्मन का दहला दिया गाँधी बाबा नेउल्फ़त की राह में मर जाना पर नाम जहाँ में कर जानाये पाठ वतन के बच्चों को सिखला दिया गाँधी बाबा नेइक धर्म की ताक़त दिखला कर ज़ालिम के छक्के छुड़वा करभारत का लोहा दुनिया से मनवा दिया गाँधी बाबा नेऐ क़ौम वतन के परवानो लो अपने फ़र्ज़ को पहचानोअब जेल से ये पैग़ाम हमें भिजवा दिया गाँधी बाबा नेचर्ख़े की तोप चला दो तुम ग़ैरों के छक्के छुड़ा दो तुमये हिन्द का चक्र-सुदर्शन है समझा दिया गाँधी बाबा नेनफ़रत थी ग़रीबों से जिन को हैं शाद अछूतों से मिल करइक प्रेम-प्याला दुनिया को पिलवा दिया गाँधी बाबा नेगिर्दाब में क़ौम की कश्ती थी तूफ़ान बपा थे आफ़त केनेशन का बेड़ा साहिल पर लगवा दिया गाँधी बाबा नेभगवान भगत ने हिम्मत की इक प्रेम-ज्वाला जाग उठीकरवा कर शीर-ओ-शकर सब को दिखला दिया गाँधी बाबा नेहँस हँस कर क़ौम के बच्चों ने सीनों पर गोलियाँ खाई हैंभारत की रह में मर मिटना सिखला दिया गाँधी बाबा नेग़ैरों के झानसों में आना दुश्वार है हिन्द के लालों कोआँखों से ग़फ़लत का पर्दा उठवा दिया गाँधी बाबा ने
कोई निशाँ बाक़ी नहींनक़्श गर लम्हों की हर तहरीरदस्त-ए-बे-निशाँ के लम्स क़ातिल का फ़साना बन गईशहर के लोगोंतुम्हारे रौज़न-ए-चाक-ए-जिगर भी बंद हैंतुम में हर इक ने किसी ख़िश्त-ए-तमन्नासंग-ए-नफ़रत सेये चश्म-ए-रौज़न-ए-दिल बंद कर केआख़िरी उम्मीद का सूरज बुझा कर रख दियाऔर अब लज़्ज़ात की दुनिया में गुमसूद-ओ-सौदा की असीरी पररज़ा-मंद का तौक़-ए-बे-निशाँ पहने हुएख़ुश हो कि जन्नत मिल गई
हम चाँद नगर पर जाते ही खोलेंगे एक नया मकतबता'लीम न होगी जिस में कभी सब आज़ादी से घूमेंगेउस्ताद पढ़ेंगे दर्जों में हम लोग ख़ुशी से घूमेंगेइस्कूल न जा कर बाग़ों में तफ़रीह करेंगे बे-मतलबहम चाँद नगर पर जाते ही खोलेंगे एक नया मकतबपढ़ने के लिए बच्चों को जहाँ मुर्ग़ा न बनाया जाएगाचाँटे न जमाए जाएँगे डंडों से न पीटा जाएगाउस्ताद के मौला-बख़्श जहाँ दिखला न सकेंगे कुछ कर्तबहम चाँद नगर पर जाते ही खोलेंगे एक नया मकतबजो याद करेगा ख़ूब सबक़ ता-उम्र न होगा पास वहीजो खेल में लेगा दिलचस्पी पढ़ने में न होगा फ़ेल कभीदर-अस्ल हमारे मकतब का होगा हर इक दस्तूर अजबहम चाँद नगर पर जाते ही खोलेंगे एक नया मकतबजिस दिन भी पड़ा बीमार कोई इस्कूल में होगा हॉलीडेदो बूँद भी पानी बरसा तो हो जाएगा फ़ौरन रेनी डेहफ़्ते में तो कम से कम छे दिन इतवार मनाएँगे हम सबहम चाँद नगर पर जाते ही खोलेंगे एक नया मकतबखेलेंगे कभी जब हम क्रिकेट तो ख़ूब उड़ाएँगे छक्केहॉकी में दिखाएँगे वो हुनर रह जाएँगे सब हक्के-बक्केहर टीम से मैचें जीतेगा हम लोगों का फूटबाल क्लबहम चाँद नगर पर जाते ही खोलेंगे एक नया मकतब
ये दरीचा है मिरी शौक़ का चाक-ए-दामाँमिरी बदनाम निगाहें, मिरी रुस्वा आँखेंये दरीचा है मिरी तिश्ना-नज़रबंद हो जाए मिरी आँख अगरइस दरीचे को खुला रहने दो
बिल्ली आई बिल्ली आईईरान से सीधे दिल्ली आईनाम था उस का माह-बानोबच्चे कहते उस को मानोदिखती थी वो शेर की ख़ालाहाथ से छुओ तो रूई का गालाआँखें नीली बाल सुनहरेमानो के थे छक्के पंजेचिकन कलेजी मटन क़ीमाउस से पहले दूध भी पीनालाड में वो तो ख़ूब ही बिगड़ीबैठे बैठे शरारत सूझीसब बच्चों की प्यारी मानोदरख़्त पे चढ़ के बैठी मानोनीचे देखा चक्कर आयाम्याऊँ म्याऊँ शोर मचायाआसिफ़ दौड़े वासिफ़ दौड़ेनीलो दौड़ी साबिर दौड़ेअम्मी दौड़ीं पापा दौड़ेपीछे से माली काका दौड़ेजितने मुँह उतनी बातेंमानो को अब कैसे उतारेंमानो को अब कैसे उतारेंमाली काका लघ्घी लाएआसिफ़ वासिफ़ कुर्सी लाएमानो साहिबा नीचे आईंख़र ख़र की ज़रा न पछताईंये बिल्ली है कि शैतान की ख़ालाक्यूँ कहते हैं शेर की ख़ालाफिर भी लगती प्यारी मानोसब बच्चों की दुलारी मानो
खेलने आए दोनों क्रिकेट बंदर हाथीउन के पीछे थे जंगल के सारे साथीकैप्टन था इक टीम का हाथी मस्त क़लंदरदूसरी टीम का कैप्टन बन बैठा था बंदरबंदर ये थे क़िस्मत वाले जीते टॉसफ़ौरन चीते को बुलवाया अपने पासओपन करने इक जानिब से आया शेरजोश में आ कर लगाया उस ने रनों का ढेरइक ओवर में बना गया वो सोला रनसतरह गेंदों में रन उस के सत्तावनइस पारी में धूम धड़का मचा गया वोचाय से पहले डबल सैंचरी बना गया वोदेख के अपनी टीम की दुर्गत हाथी चौंकाख़ुद करने बॉलिंग कवर से आया दौड़ापहली बॉल ही चीते के इस्टम्प को मारादूसरी बॉल में शेर ड्रेसिंग रूम सिधारातीसरी बॉल पे सांभर जी ने कैच दियाचौथी बॉल पे रीछ बेचारा बोल्ड हुआइक ओवर में चार विकट थे ज़ीरो रनहाथी ने रिकॉर्ड बना डाला ए-वनएक इनिंग में आठ विकट कीपर के कैचनन्हा सा ख़रगोश हुआ मैन ऑफ़ दी मैचदो सौ बीस पे बंदर जी की टीम ऑल आउटपहले रोज़ मछन्दर जी की टीम ऑल आउटदूसरे दिन हाथी के उतरे बल्लेबाज़बल्लेबाज़ी में लेकिन न थे मुम्ताज़बंदर जी ने फॉलो-आन की शेख़ी मारीसोचा ख़त्म करेंगे उन की जल्दी पारीहाथी आया दो साथी आउट होने परवो चकराया अपनी दो विकटें खोने परहाथी के आने से पारी सँभल गई थीवैसे भी अब पिच की हालत बदल गई थीहाथी आया चौके छक्के मारा ख़ूबबंदर दौड़ा इधर उधर बेचारा ख़ूबतीन सौ तेरह बना के हाथी नॉट आउट थाअपने कर्तब दिखा के हाथी नॉट आउट थादो विकटों पे लगा था छे सौ रनों का ढेरफिर पारी डिक्लियर करने में क्या देरदूसरी पारी में बंदर की उड़ी हँसीअस्सी ही रन बना के पूरी टीम गईतीन सौ रन और दस विकटों से मात हुईजीत हुई हाथी की ऊँची बात हुई
जंगल में वन डे क्रिकेट का हुआ अनोखा मैचबंदर ने की ख़ूब फ़ील्डिंग पकड़े छे छे कैचज़ीरो पर लंगूर गया तो हिरन तीन पर आउटएल बी डब्लयू गैंडा भागा नहीं था कोई डाउटगीदड़ ने आते ही जैसे ली अपनी पोज़ीशनकंगारू की गेंद थी इस्पिन बदल गई सिचुएश्नविकट बचा न पाया गीदड़ बल्ला अजब घुमायाबंदर के हाथों में सीधे अपना कैच थमायासींग हिलाते बारा-सिंघा ने अब बैट सँभालाकंगारू की सेकेंड बाल थी चूक गया बेचारागेंद घुसी इस्टम्प बिखेरा गिल्ली छिटकी दूरएक बड़ा स्कोर का सपना हो गया आख़िर चूरलौट चला जब बारा-सिंघा भालू चाचा आएगेंद तीसरी कंगारू की वो भी झेल न पाएलगातार तीनों गेंदों पर विकट गिरे थे तीनकंगारू के इस ओवर ने बदल दिया था सीनजल्दी जल्दी विकट गँवाए बिगड़ गई थी हालतजमे जमाए हाथी दादा भेज रहे थे ला'नतभालू गया ज़ेबरा आया अब के बल्ला थामेनव्वे पर हाथी पहुँचा था लगा उसे समझानेबल्ला चमका गेंद उड़ी एम्पायर बोला सिक्सहाथी ने फिर फ़ौरन टोका पहले होलो फिक्सचौके और छक्के की बारिश थोड़ा रुक कर करनामैच अगर है हमें जीतना विकट बचाए रखनाओवर नया लिए चीता अब बॉलिंग करने आयादो गेंदों पर लगातार हाथी ने सिक्स जमायाबिना सैंचरी हाथी ने अरमान नए कुछ बाँधेचीते की इक तेज़ गेंद ने तोड़े सभी इरादेहाथी के आउट होते ही जो आया वो बेबसनॉट आउट का तमग़ा ले कर हुआ ज़ेबरा वापसकप्तानी थी शेर के ज़िम्मे जीत लिया था मैचबंदर ने की ख़ूब फ़ील्डिंग पकड़े छे छे कैच
क़दम क़दम पे मुझे ये ख़याल आता हैतिरी नज़र का सहारा मिले तो क्या कम है!ख़िज़ाँ में रह के बहारों की आरज़ू न करूँजो ज़ख़्म-ए-दिल भी महक कर खिले तो क्या कम है!हज़ार चाक हैं दामान-ए-ज़िंदगी के मगरजो एक चाक-ए-गरेबाँ सिले तो क्या कम है!
ऐ ज़मिस्ताँ की हुआ तेज़ न चलइस क़दर तेज़ न हो मौज-ए-सुबुक-ख़ेज़ की रौकहीं अश्जार के ख़ेमों की तनाबें कट जाएँज़र्द पत्ते हैं अभी गुलशन-ए-हस्ती का सिंघारकह रही है ये अभी अहद-ए-गुज़शता की बहाररंग-रफ़्ता हूँ मगर आज भी तस्वीर में हूँमुर्तसिम हैं मिरी शाख़ों पे मिरी याद के चाँदमैं हनूज़ अपने ख़यालात की ज़ंजीर में हूँअभी पत्तों पे चमक उठता है रंगों का ग़ुबारअभी शाख़ों में लहक जाती है बुलबुल की पुकारबर्ग-रीज़ाँ से कहो शहर से बाहर ठहरेशहर के बाग़ से बुस्तान-ए-दबिस्ताँ से परेबर्ग-ए-लर्ज़ां में तड़पता है अभी ज़ौक़-ए-नुमूपर-ए-ताऊस में है रक़्स की ख़्वाहिश अब भीअभी करता है चमन चाक-ए-गरेबाँ को रफ़ूयूँ तो क़ानून हैं फ़ितरत के अटलऐ ज़मिस्ताँ की हवा तेज़ न चलसई-ए-मलबूस में हैं कितने नगों बख़्त-ए-ज़बूँज़िंदगी जिन के लिए सहन-ए-समन-पोश नहींदूर के देस से आई हुई उतरन के लिएमर्द-ओ-ज़न कूचा-ओ-बाज़ार में रुस्वा हैं अभीजैसे हो क़हर-ए-मुजस्सम तिरी यख़-बस्ता जबींतेरी आहट में हो जैसे किसी दहशत का पयामतेरी दस्तक से लरज़ते हैं मकाँ और मकींवो मकाँ जिन के दर-ओ-बाम दर-ओ-बाम नहींवो मकीं जिन के लिए इशरत-ए-अय्याम नहींजिन के लहजों में नहीं लज़्ज़त-ए-गुफ़्तार का रंगजिन की आवाज़ में हैं तीरा-नसीबी के अज़ाबजिन से तहज़ीब लिया करती है जीने का ख़िराजजिन की हर साँस है अंदेशा-ए-फ़र्दा का निसाबइस क़दर तुंद न हो देख सँभलऐ ज़मिस्ताँ की हुआ तेज़ न चल
आज किस आलम में हैं अहबाब मेरेआँख में ताब-ओ-तब ओ नम कुछ नहींदिल किसी रेफ़्रीजरेटर में रखे होंगे कहींजिस्म हाज़िर हैं यहाँ ग़ाएब दिमाग़मुस्कुराहट: इक लिपस्टिक ख़ंदा-पेशानी नक़ाबरूह: बुर्क़ा-पोश: आँखें बे-हिजाब!किस लिए मुझ को परेशाँ कर रहे हैं ख़्वाब मेरेनींद के ज़ख़्मी कफ़-ए-पा से टपकता है ख़ुद अपना ही लहूख़्वाब में फूलों से आती है ख़ुद अपने ख़ूँ की बूबे-अमल हूँ (ख़्वाब में हूँ) फिर भी जारी (एक बेनाम-ओ-निशाँ सी) जुस्तुजूदरमियाँ से इस ज़मीं को चीरता जाता है चाक-ए-इर्तिक़ामौत आ कर खटखटाती रहती है दर आँख काकिस लिए खिंचते चले जाते हैं ये आसाब मेरेअहद-ए-नौ के किस मुग़न्नी का जुनूँतारसप्तक मैं उन्हें करता हूँ ट्यूनकौन इन तारों को इतना कस रहा हैटूट जाएँगे तो इस नग़्मे से भी महरूम हो जाएगा साज़जिस में शामिल है शिकस्त-ए-ज़ात की आवाज़
ज़ेहन में अपने इल्म भरेंदो का पहाड़ा याद करेंदो एकम दो दो दोना चारसब से उल्फ़त सब से प्यारदो तिया छे और दो चौके आठपढ़ लिख कर तुम करना ठाटदो पंजे दस दो छक्के बारहभारत ख़ुशियों का गहवारादो सत चौदह दो अठे सोलायाद करो ऐ मुन्ना राजादो नम अठारह दो दहाम बीसख़त्म पहाड़ा लाओ फ़ीस
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books