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नज़्म
क़ुर्बानी ऐसे हाल में अम्र-ए-मुहाल है
बकरा ''तमाम हल्क़ा-ए-दाम-ए-ख़याल है''
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
सुब्ह-दम बाद-ए-सबा की शोख़ियाँ काम आ गईं
लाला-ओ-गुल को बग़ल-गीरी का मौक़ा मिल गया
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
ये नमक-ख़्वारान-ए-मिल्लत जब कहीं पीते हैं चाय
''आगही दाम-ए-शुनीदन जिस क़दर चाहे बिछाए''
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
जिस ने मुझे देखा वो यही कहता था हर दम
''जब तक कि न देखा था क़द-ए-यार का आलम''
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
आज तो हम बिकने को आए, आज हमारे दाम लगा
यूसुफ़ तो बाज़ार-ए-वफ़ा में, एक टिके को बिकता है
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
मोहब्बत करने वालों की मोहब्बत से बहुत कम था
दम-ए-रुख़्सत हम उन के आगे जितना रो के आए हैं
नवाब सय्यद हकीम अहमद नक़्बी बदायूनी
नज़्म
सीनों में दिल यूँ जैसे चश्म-ए-आज़-ए-सय्याद
ताज़ा ख़ूँ के प्यासे अफ़रंगी मर्दान-ए-राद
नून मीम राशिद
नज़्म
दर्द-ओ-ग़म हल्क़ा-ए-ज़ंजीर दर-ओ-बाम-ए-क़फ़स
कल जो चुभते थे वही ख़ार सदा देते हैं
अयाज़ बिलग्रामी
नज़्म
दाम-ए-हर-मौज-ए-तख़य्युल में है कश्ती की तरह
और तूफ़ान है गिर्दाब है 'ग़ालिब' की ग़ज़ल
मोहम्मद अब्दुल क़ादिर अदीब
नज़्म
जो खिंच के नज़्अ' में दम आ गया है अश्कों में
दम-ए-विदाअ' तिरा इंतिज़ार बाक़ी है