aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "dagdage"
उठ मिरी जान मिरे साथ ही चलना है तुझेतोड़ ये अज़्म-शिकन दग़दग़ा-ए-पंद भी तोड़
बरसा लबों से फूल तिरी उम्र हो दराज़सँभले हुए तो हैं प ज़रा डगमगा तो लें
कहता है कोई गिर कर ये ऐ ख़ुदाए लीजोकोई डगमगा के हर-दम कहता है वाए लीजो
कि साहिल से कश्ती तक आते हुएजैसे तख़्ते के हमराह दिल डगमगाए
गुन-गुना कर नज़र उठा कर पीसुब्ह का शीर दग़दग़ा कर पी
एक इंसाँ की हक़ीक़त क्या हैडगमगाए तो सहारा न मिले
ज़रा भी न अपने क़दम डगमगाएउठो आज ख़ुशियों के हम गीत गाएँ
उधर से शाइ'र 'नुशूर'-ए-हैराँ भी अपनी सैरों में जा रहा हैक़दम तख़य्युल में डगमगाए नए शबाबों से चोट खाए
तुम्हारे नन्हे-मुन्ने पाँव अक्सर डगमगा जातेक़दम भी लड़खड़ा जाते
जैसे तख़्ते के हमराह दिल डगमगाएवही नौ बरस
मक़ाम ऐसे भी हैं जिन पर क़दम यूँ डगमगाए थेकि शानों पर रखी सारी इमारत डोल जाती थी
पलट दे ज़ोर-ए-बाज़ू सेना कश्ती डगमगाए उस की लहरों के तलातुम पर
फाँदी बड़ी सी झाड़ीयूँ डगमगा के लड़के
दो चींटे कश्ती के मुसाफ़िर बने हुए हैंडग-मग डग-मग
हर मुश्किल हालात और हर तूफ़ान सेडगमगा ना रास्तों से और इन सुरंग से
और इस धारे संग चली हैडग-मग डग-मग जीवन नाव
अभी सब दग़दग़ा मिट जाए ये सय्याद-ओ-गुलचीं काजो हम पैदा शु'ऊर-ए-ज़िंदगी-ए-गुलिस्ताँ कर लें
सफ़ीना-ए-शौक़-ओ-शे'र दुनिया-ए-नूर में डगमगा रहा है
तुम बिन मेरा जीवन फीकामन की नय्या डग-मग डोले
अब डगमगा रहा है इरादाऔर मैं ख़ामोश हूँ
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