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नज़्म
लोग ज़ालिम हैं हर इक बात का तअना देंगे
बातों बातों में मिरा ज़िक्र भी ले आएँगे
कफ़ील आज़र अमरोहवी
नज़्म
इस इश्क़ न उस इश्क़ पे नादिम है मगर दिल
हर दाग़ है इस दिल में ब-जुज़-दाग़-ए-नदामत
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
मुझे ऐ हम-नशीं रहने दे शग़्ल-ए-सीना-कावी में
कि मैं दाग़-ए-मोहब्बत को नुमायाँ कर के छोड़ूँगा
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
चमक तारे से माँगी चाँद से दाग़-ए-जिगर माँगा
उड़ाई तीरगी थोड़ी सी शब की ज़ुल्फ़-ए-बरहम से
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
बनेंगे रातों में चाँदनी हम तो दिन में साए बिखेर देंगे
वो चाँद-चेहरा सितारा-आँखें
उबैदुल्लाह अलीम
नज़्म
ये शेर तुम को मिरी रूह का पता देंगे
यही तुम्हें मिरे अज़्म ओ अमल की देंगे ख़बर
जाँ निसार अख़्तर
नज़्म
दाग़-ए-गुल-ओ-ग़ुंचा के बदले महकी हुई ख़ुश्बू लेंगे
मिली ख़लिश पर ज़ख़्म-ए-जिगर की इस आबाद ख़राबे में
अख़्तरुल ईमान
नज़्म
तहज़ीब हाफ़ी
नज़्म
अभी तो गोद में हैं देवताओं की वो माह-ओ-साल
जो देंगे बढ़ के बर्क़-ए-तूर से हयात को जलाल