aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "dar-parda"
पीता बग़ैर इज़्न ये कब थी मिरी मजालदर-पर्दा चश्म-ए-यार की शह पा के पी गया
दर-पर्दा कभी शेर कभी गीत की लय परमासूम वफ़ाओं का ये इज़हार है कैसा
जाने क्या कुछ दर-पर्दा हैशायद आज समझ में आए क्या देखा है क्या धोका है
ख़ूब हुए नज़र नज़र कूचा-ए-ए'तिबार मेंकितने हैं चाक देखिए जल्वा-ए-पर्दा-दार में
तेरे सर परपर-दार बेल का साया है
हर क़िस्म की जदीद इमारत हमारे पासहर एक पर्दा-दार-ए-तिजारत हमारे पास
ऐ ज़मानेहम तिरी तकज़ीब कर सकते नहीं
दर्द पैदा हुआ दरमाँ कोई पैदा न हुआ
अब मिरे जिस्म पे रुस्वाई का पैराहन हैतुम उसे चाक नहीं कर सकते
इक तेग़ की जुम्बिश सी नज़र आती है मुझ कोइक हाथ पस-ए-पर्दा-ए-दर देख रहा हूँ
म-ए-पर्दा-दारशीशे के दर से झाँकी
ख़यालों में बसा रहता है हर दमनिगाहों से जो पर्दा कर गया है
क़ौमों के लिए मौत है मरकज़ से जुदाईहो साहिब-ए-मरकज़ तो ख़ुदी क्या है ख़ुदाई
ताज तेरे लिए इक मज़हर-ए-उल्फ़त ही सहीतुझ को इस वादी-ए-रंगीं से अक़ीदत ही सही
ज़हे-क़िस्मत हिलाल-ए-ईद की सूरत नज़र आईजो थे रमज़ान के बीमार उन सब ने शिफ़ा पाई
इस तरह है कि हर इक पेड़ कोई मंदिर हैकोई उजड़ा हुआ, बे-नूर पुराना मंदिर
परदा-हा-ए-दिमाग़ में वो शेरदेर तक गूँजता ही रहता है
तू आ गई शामसुरमई वहशत ओ हज़ीमत के साए साए
फिर झरोकों में कोई चाँद उतर आया हैफिर सर-ए-पर्दा-ए-दर जुंबिश-ए-मिज़राब हुई
बुझा दोलहू के समुंदर के उस पार
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