aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "dard-e-talab"
अपनी अक़दार से तसादुम-ख़ेज़दर्द-ए-एहसास की नुमू-ख़ेज़ी
बारिश-ए-संग-ए-अलम अपना मुक़द्दर ठहरीराहत-ए-दर्द मिली लुत्फ़-ओ-करम के बदले
किस से इस दर्द-ए-जुदाई की शिकायत कहिएयाँ तो सीने में नियस्तां का नियस्तां होगा
दिल दर्द की शिद्दत से ख़ूँ-गश्ता ओ सी-पाराइस शहर में फिरता है इक वहशी-ओ-आवारा
ऐ शख़्स जो तू आकर यूँ दिल में समाया हैतू दर्द कि दरमाँ है तो धूप कि साया है?
तिश्नगी वज्ह-ए-तलबज़ौक़-ए-तलब हुस्न-ए-तलब
ज़ौक़-ए-तलब के भी हैंमेआर अजब
जिन की राह-ए-तलब से हमारे क़दममुख़्तसर कर चले दर्द के फ़ासले
ये ज़ख़्म-ए-तलब ये ना-मुरादीहर बुत के लबों पे है तबस्सुम
तू देख तिरे दिल में है सोज़-ए-तलब कितनामत पूछ दु'आओं में ये बे-असरी क्यों है
बेताब हो के दस्त-ए-तलब जब किया दराज़हासिल जो सामने था बहुत दिल-ख़राश था
फ़क़ीरी में यही असबाब-ए-हस्ती था यही दर्द-ए-तह-ए-जाम-ए-तमन्ना थायही सामाँ बचा लेते तो अच्छा था
सज्दा-ए-तलब चमकाहर्फ़-ए-कुंज-ए-लब चमका
कहाँ ये क़तरा मिसाल-ए-दरियाकहाँ मिरी मंज़िल-ए-तलब है
दीवार-ए-गिर्या से ले करचश्म-ए-तलब के पार तलक
तेरे मासूम ख़्वाबों का दस्त-ए-तलबहाँ हवा भी गुलाबी है अब
तेरे मा'सूम ख़्वाबों का दस्त-ए-तलबहाँ हवा भी गुलाबी है अब
किस ज़मीं से मिरा त'अल्लुक़ हैकौन हुस्न-ए-तलब बताएगा
दयार-ए-ग़ैर में तुम को कहाँ मैं ढूँडूँगाये ख़त्म-ए-अहद-ए-तरब है मिरे गले लग जाओ
ये मुर्दा ऊँट जो सहरा के ज़र्द रंगों मेंकिसी ने दश्त-ए-तलब में सजा के रक्खे हैं
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books