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नज़्म
ये इक आसूदगी चेहरे पे ये ठहराव आँखों में
ये अश्कों से भरी छागल ये बे-पर्दा-ओ-ख़ुद-सर दिल
शफ़ीक़ फातिमा शेरा
नज़्म
क़ौल-ए-ख़ुद-सर था कि ताक़त का नशा है ज़िंदगी
इक क़रीब-उल-मर्ग बोला ख़्वाब सा है ज़िंदगी
शाहीन भट्टी
नज़्म
सर-ए-ख़ुद-नेहादा नहीं मिला
सर-ए-ख़ुद-नेहादा ब-कफ़ ये में कि ज़मीन इक कफ़-ए-जू
मोहम्मद अनवर ख़ालिद
नज़्म
इक़बाल सुहैल
नज़्म
मैं जो देवता-ए-अना नर्गिसिय्यत का मारा हुआ वो जो ख़ुद-सर था
ज़िद्दी था मग़रूर था
सोहैब मुग़ीरा सिद्दीक़ी
नज़्म
बर्फ़ ने बाँधी है दस्तार-ए-फ़ज़ीलत तेरे सर
ख़ंदा-ज़न है जो कुलाह-ए-मेहर-ए-आलम-ताब पर
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मिटा डालेंगे हम हर ख़ुद-सर ओ मग़रूर का ग़र्रा
तह-ओ-बाला निज़ाम-ए-किब्र-ओ-नख़वत कर के छोड़ेंगे
अहमक़ फफूँदवी
नज़्म
सुनो गर सुन सको तुम दास्तान-ए-ख़ूँ-चकाँ मेरी
रुला देगी मगर आँसू लहू के दास्ताँ मेरी