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नज़्म
हाँ दिखा दे ऐ तसव्वुर फिर वो सुब्ह-ओ-शाम तू
दौड़ पीछे की तरफ़ ऐ गर्दिश-ए-अय्याम तू
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
मुँह में घुसती है सुरंगों के यकायक दौड़ कर
दनदनाती चीख़ती चिंघाड़ती गाती हुई
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
घंटी बाँध के चूहे जब बिल्ली से दौड़ लगाते थे
पेट पे दोनों हाथ बजा कर सब क़व्वाली गाते थे
गुलज़ार
नज़्म
वो साँवले-पन पर मैदाँ के हल्की सी सबाहत दौड़ चली
थोड़ा सा उभर कर बादल से वो चाँद जबीं झलकाने लगा
जोश मलीहाबादी
नज़्म
सर-ए-साहिल जो बहती शम्अ की लौ गुनगुनाती है
दिमाग़ ओ दिल में जिन से इक किरन सी दौड़ जाती है