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नज़्म
पहुँचता है हर इक मय-कश के आगे दौर-ए-जाम उस का
किसी को तिश्ना-लब रखता नहीं है लुत्फ़-ए-आम उस का
ज़फ़र अली ख़ाँ
नज़्म
ये जवानी, ये परेशानी, ये पैहम इज़्तिराब
बार-हा उलझन में दौड़ा हूँ सू-ए-जाम-ए-शराब
मुईन अहसन जज़्बी
नज़्म
बे-ख़ुदी के नाम पर जब दौर-ए-जाम-ए-बादा था
जब तजल्ली-ए-हक़ीक़त से हर इक दिल सादा था
सीमाब अकबराबादी
नज़्म
जब भी महताब-ए-ज़र-अफ़्शाँ के हो चेहरे पे नक़ाब
जान हम रख के हथेली पर उलट देते हैं
नूर-ए-शमा नूर
नज़्म
बिर्ज लाल रअना
नज़्म
आज भी ज़िंदगी मिरी ग़र्क़-ए-शराब-ए-तुंद-ओ-तेज़
आज भी हाथ में मिरे जाम-ए-शराब-ए-अर्ग़वाँ
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
वो क्या आता कि गोया दौर में जाम-ए-शराब आता
वो क्या आता रंगीली रागनी रंगीं रुबाब आता
मख़दूम मुहिउद्दीन
नज़्म
फ़क़ीरी में यही असबाब-ए-हस्ती था यही दर्द-ए-तह-ए-जाम-ए-तमन्ना था
यही सामाँ बचा लेते तो अच्छा था
साजिदा ज़ैदी
नज़्म
अभी तलक तो हुआ ज़िक्र-ए-जाम-ओ-बादा-ए-नाब
अब आदमी के दिल-ए-ख़ूँ-चकाँ की बात करें
मंशाउर्रहमान ख़ाँ मंशा
नज़्म
हो अगर हाथों में तेरे ख़ामा-ए-मोजिज़ रक़म
शीशा-ए-दिल हो अगर तेरा मिसाल-ए-जाम-ए-जम