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नज़्म
कि अब तक मैं अँधेरों की धमक में साँस की ज़र्बों पे
चाहत की बिना रख कर सफ़र करता रहा हूँगा
मोहसिन नक़वी
नज़्म
फिर भी सुनती हूँ अपने लहू में बीते समय की नर्म धमक
वो समय जो मेरे जनम से पहले बीत गया
फ़हमीदा रियाज़
नज़्म
आम मौज़ू-ए-सुख़न में भी अयाँ लहजा-ए-ख़ास
ज़ेहन की बात में भी दिल की धमक का एहसास