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नज़्म
है अज़ल से मेरे पहलू में दिल-ए-मोमिन निहाद
मेरी नज़रें तोड़ देती हैं तिलिस्म-ए-बर्क़-ओ-बाद
अफ़सर सीमाबी अहमद नगरी
नज़्म
तू ने दिल चीर के ज़र्रों का दरूँ भी देखा
तेरी नज़रों में था सूरज भी चराग़-ए-रह-ए-बाद
शुजा फ़र्रुख़ी
नज़्म
जो चलता है तो क़दमों की कोई आहट नहीं होती
तलाश-ए-फ़र्क़-ए-नेक-ओ-बद की ख़्वाहिश को लिए दिल में
फ़ैसल हाशमी
नज़्म
नेकी-ओ-बदी ख़ूबसूरती-ओ-बद-सूरती सब से बे-नियाज़ थी सरापा राज़ थी
और ज्ञान एक जागे हुए दिल का नाम था
अहमद हमेश
नज़्म
न रहा ग़लबा-ए-सौदा-ए-बयान-ए-ग़ालिब
'दाग़' ने पाई दिल-ए-तफ़्ता में जा तेरे बाद
ज़ाहिदा ख़ातून शरवानिया
नज़्म
इसी हालत में गुज़र जाएँगे बाक़ी दिन भी
इक दिन आ जाएगी बस मेरी क़ज़ा पिंजरे में