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नज़्म
इक दिल-ए-शोला-ब-जाँ साथ लिए जाता हूँ
हर क़दम तू ने कभी अज़्म-ए-जवाँ बख़्शा था!
जाँ निसार अख़्तर
नज़्म
सर-ब-कफ़ हिन्द के जाँ-बाज़-ए-वतन लड़ते हैं
तेग़-ए-नौ ले सफ़-ए-दुश्मन में घुसे पड़ते हैं
बर्क़ देहलवी
नज़्म
बारिश-ए-ख़ून-ए-दिल-ओ-जाँ से बुझा दी सर-ए-बज़्म
झूट की शम'-ए-फ़रोज़ाँ तिरे परवानों ने
मुस्लिम शमीम
नज़्म
अभी आज़ादी-ए-जिस्म-ओ-दिल-ओ-जाँ का तराना हम ने छेड़ा था
अभी कस ने तुम्हारे दिल पे फिर फूँका वही मंतर
अमीक़ हनफ़ी
नज़्म
जब फ़िक्र-ए-दिल-ओ-जाँ में फ़ुग़ाँ भूल गई है
हर शब वो सियह बोझ कि दिल बैठ गया है