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नज़्म
कोई देखे तो इस की क़ुव्वत-ए-तख़्लीक़ का आलम
बना सकती है ज़ेर-ए-चर्ख़ लाखों आसमाँ उर्दू
अलम मुज़फ़्फ़र नगरी
नज़्म
उँगलियाँ ख़ून से तर दिल-ए-कम-ज़र्फ़ को है वाहम-ए-अर्ज़-ए-हुनर
दिन की हर बात हुई बे-तौक़ीर
उबैदुल्लाह अलीम
नज़्म
ऐ दिल-ए-काफ़िर इज्ज़ से मुनकिर आज तिरा सर ख़म क्यूँ है
तेरी हटेली शिरयानों में ये बेबस मातम क्यूँ है
फ़हमीदा रियाज़
नज़्म
घर ऐ दिल-ए-बे-क़रार ज़िंदाँ से कम नहीं क़ैद कौन काटे
हसीन सरमा का चाँद दीवाना-वार को बुला रहा है
अब्दुल अज़ीज़ फ़ितरत
नज़्म
ऐ दिल-ए-अफ़सुर्दा ऐ कम-बख़्त ऐ हसरत-नसीब
ऐ फ़रेब-ए-हुस्न के पामाल ऐ फुर्क़त-नसीब
सय्यद आबिद अली आबिद
नज़्म
मज़ाक़-ए-आम सर्फ़-ए-कम-निगाही है तो रहने दो
दिल-ए-शाइ'र की आँखों में अभी तनवीर बाक़ी है
राम प्रकाश राही
नज़्म
जैसे कच्ची नींद से नाज़ुक पपोटों पर वरम
जैसे मीना-ए-तही के दिल में फ़िक्र-ए-बेश-ओ-कम
मयकश अकबराबादी
नज़्म
कुछ तो है वज्ह-ए-दिल-आज़ारी-ओ-आहंग-ओ-सतेज़
वर्ना ये तब-ए-ख़ुश-अख़्लाक़-ओ-कम-आमेज़ भी है
मुस्तफ़ा ज़ैदी
नज़्म
कितना दर्द-आमेज़ था नग़्मा दिल-ए-नाशाद का
तीर तरकश में तड़प उट्ठा सितम ईजाद का