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नज़्म
जमील मज़हरी
नज़्म
ज़मीं पर ज़िंदगी है हुस्न है और दिलरुबाई है
मुझे उल्फ़त ज़मीं से है वही दिल में समाई है
अब्दुल क़ादिर
नज़्म
गुल-बदन गुल-पैरहन महताब-रुख़ नाज़-आफ़रीं
दिलरुबाई की अदाकारी में ए'जाज़-आफ़रीं
सय्यद आबिद अली आबिद
नज़्म
ऐ अंदलीब-ए-गुलशन मैं हूँ तिरा फ़िदाई
इस सौत-ए-जाँ-फ़ज़ा की अल्लह रे दिल-रुबाई
मास्टर बासित बिस्वानी
नज़्म
हर चीज़ में है इस की इक शान-ए-दिलरुबाई
दरिया पहाड़ जंगल हर शय में बाँकपन है
मोहम्मद शफ़ीउद्दीन नय्यर
नज़्म
हुस्न का आग़ोश-ए-रंगीं दिल-फ़रेब-ओ-दिलरुबा
इल्म से बन जाए अक़्लीदस का महज़ इक दायरा!
जोश मलीहाबादी
नज़्म
मुर्ग़ान-ए-बाग़ बन कर उड़ते फिरें हवा में
नग़्मे हों रूह-अफ़्ज़ा और दिल-रुबा सदाएँ