aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "do-pahrii"
भरी दो-पहरी में अँधियारासूरज परछाईं से हारा
ठेठ झूट की जेठ झूट कीशिखर दो-पहरी
एक चादर की तरह बिछती थीगर्मियों की भरी दो-पहरी में
गुल-ए-दो-पहरी के फूलगमलों में मुरझा गए हैं
सारी दो-पहरी खेलते थेया डाली-डाली बे-मक़्सद आवारा घूमा करते थे
गाँव की दो-पहरी धूप के सन्नाटों सेख़ुश्क नहरों के किनारों पे थकी छाँव से
तपती दो-पहरी कीछाँव के डेरों में
उन्हें बताता हूँ सर्द मौसम में धूप थी सोबे-रुख़ी की रिदा को ओढ़े किसी दो-पहरी में सो गए हो
की ख़ातिर सूरत-ए-दस्तार है वोसुब्ह-ए-तख़्लीक़-ओ-तसव्वुर है जवानी की दो-पहरी
माँ उन के आगे कोस कड़ेऔर सर पे कड़कती दो-पहरी
वही जो उदासी की जलती दो-पहरी मेंराहत का अरमाँ लिए ढूँढता है
वो जो अपने पिछवाड़े इक बेरी थीसारी दो-पहरी लड़के उस के गिर्द इकट्ठा रहते थे
वो छतरी की तरह खुल करमिली है
धड़कनें मचलती हैं सीने मेंसाँसों को पहरे पे बिठा रखा है
रंग-बिरंगे सपने दे करदिल बहलाती लाल परी
अब्बा जब बाज़ार से आएआते आते आम भी लाए
लेकिनबहलावे की पहली बारिश पड़ने दो
ज़बाँ तुम काट लो या फिर लगा दो होंठ पर तालेमिरी आवाज़ पर कोई भी पहरा हो नहीं सकता
दूर इक फ़ाख़्ता बोली है बहुत दूर कहींपहली आवाज़ मोहब्बत की सुनाई दी है
एक कहानी और सुना दो एक कहानी औरएक कहानी एक कहानी अच्छी नानी और
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