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नज़्म
अख़्तर शीरानी
नज़्म
दुआएँ फूँक कर बच्चों को बिस्तर पर सुलाती थीं
और अपनी जा-नमाज़ें मोड़ कर तकिया लगाती थीं
असना बद्र
नज़्म
दुआ को हाथ उठाता हूँ दुआएँ उस की ख़ातिर हैं
मैं गोया हूँ कि मेरी सब सदाएँ उस की ख़ातिर हैं