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नज़्म
मगर एक ही रात का ज़ौक़ दरिया की वो लहर निकला
हसन कूज़ा-गर जिस में डूबा तो उभरा नहीं है!
नून मीम राशिद
नज़्म
ख़ुर्शीद वो देखो डूब गया ज़ुल्मत का निशाँ लहराने लगा
महताब वो हल्के बादल से चाँदी के वरक़ बरसाने लगा
जोश मलीहाबादी
नज़्म
हर तरफ़ सोग में डूबा हुआ मेरा माहौल
मेरा उजड़ा हुआ घर 'मीर' के घर के मानिंद
ख़लील-उर-रहमान आज़मी
नज़्म
मोहब्बत की निगूँ-सारी से दिल डूबा सा रहता है
मोहब्बत दिल की इज़्मेहलाल से शर्माई जाती है
कैफ़ी आज़मी
नज़्म
बशर नवाज़
नज़्म
क्या कहूँ कैसे कहूँ रह रह के ये सोचा किया
जब न कुछ भी बन पड़ा तो दर्द में डूबा किया
हसरत जयपुरी
नज़्म
दुश्नाम और बलवों के और दू-ब-दू के बीच
जैसे कि कोई बैठा हो बज़्म-ए-अदू के बीच