aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "eff"
उट्ठी है मग़रिब से घटापीने का मौसम आ गयाहै रक़्स में इक मह-लक़ानाज़ुक अदा नाज़-आफ़रींहाँ नाचती जा गाए जानज़रों से दिल बर्माए जातड़पाए जा तड़पाए जाओ दुश्मन-ए-दुनिया-ओ-दीं!तेरा थिरकना ख़ूब हैतेरी अदाएँ दिल-नशींलेकिन ठहर तू कौन हैओ नीम-उर्यां नाज़नींक्या मशरिक़ी औरत है तूहरगिज़ नहीं हरगिज़ नहींतेरी हँसी बेबाक हैतेरी नज़र चालाक हैउफ़ किस क़दर दिल-सोज़ हैतक़रीर बाज़ारी तिरीकितनी हवस-आमोज़ हैये सादा पुरकारी तिरीशर्म और इज़्ज़त वालियाँहोती हैं इफ़्फ़त वालियाँवो हुस्न की शहज़ादियाँपर्दे की हैं आबादियाँचश्म-ए-फ़लक ने आज तकदेखी नहीं उन की झलकसरमाया-ए-शर्म-ओ-हयाज़ेवर है उन के हुस्न काशौहर के दुख सहती हैं वोमुँह से नहीं कहती हैं वोकब सामने आती हैं वोग़ैरत से कट जाती हैं वोएज़ाज़-ए-मिल्लत उन से हैनाम-ए-शराफ़त उन से हैईमान पर क़ाएम हैं वोपाकीज़ा-ओ-साएम हैं वोतुझ में नहीं शर्म-ओ-हयातुझ में नहीं मेहर-ओ-वफ़ासच सच बता तू कौन हैओ बे-हया तू कौन हैएहसास-ए-इज़्ज़त क्यूँ नहींशर्म और ग़ैरत क्यूँ नहींये पुर-फ़ुसूँ ग़म्ज़े तिरेना-महरमों के सामनेहट सामने से दूर होमरदूद हो मक़हूर होतक़दीर की हेटी है तूशैतान की बेटी है तूजिस क़ौम की औरत है तूउस क़ौम पर लअ'नत है तूलेकिन ठहर जाना ज़रातेरी नहीं कोई ख़तामर्दों में ग़ैरत ही नहींक़ौमी हमीयत ही नहींवो मिल्लत-ए-बैज़ा कि थीसारे जहाँ की रौशनीजमइय्यत-ए-इस्लामियाँशाहनशह-ए-हिन्दोस्ताँअब इस में दम कुछ भी नहींहम क्या हैं हम कुछ भी नहींमिल्ली सियासत उठ गईबाज़ू की ताक़त उठ गईशान-ए-हिजाज़ी अब कहाँवो तुर्कताज़ी अब कहाँअब ग़ज़नवी हिम्मत गईअब बाबरी शौकत गईईमान आलमगीर कामुस्लिम के दिल से उठ गयाक़ौम अब जफ़ा-पेशा हुईइज़्ज़त गदा-पेशा हुईअब रंग ही कुछ और हैबे-ग़ैरती का दौर हैये क़ौम अब मिटने को हैये नर्द अब पिटने को हैअफ़्सोस ये हिन्दोस्ताँ!ये गुलशन-ए-जन्नत-निशाँ!ईमान-दारों का वतनताअ'त-गुज़ारों का वतनरह जाएगा वीराना फिरबन जाएगा बुत-ख़ाना फिरलेकिन मुझे क्या ख़ब्त हैतक़रीर क्यूँ बे-रब्त हैऐसा बहक जाता हूँ मैंमुँह आई बक जाता हूँ मैंइतना शराबी हो गयाअक़्ल-ओ-ख़िरद को खो गयामुझ को ज़माने से ग़रज़मिटने मिटाने से ग़रज़हिन्दोस्ताँ से काम क्याअंदेशा-ए-अंजाम क्याजीने दो जीने दो मुझेपीने दो पीने दो मुझेजब हश्र का दिन आएगाउस वक़्त देखा जाएगाहाँ नाचती जा गाए जानज़रों से दिल बर्माए जातड़पाए जा तड़पाए जाओ दुश्मन-ए-दुनिया-ओ-दीं
देखते ही देखते उन्हों ने सय्यारे को लफ़्ज़ों से भर दियाफ़ैसलों और फ़ासलों को तूल देने का फ़न उन्हें ख़ूब आता हैजहाज़ बंदरगाहों में खड़े हैंऔर घरों, गोदामों, दुकानों मेंकिसी लफ़्ज़ के लिए जगह नहीं रहीइतने बहुत से लफ़्ज़... उफ़ ख़ुदाया!मुझे इस ज़मीन पर चलते हुए अट्ठाईस बरस हो गएबाप, माँ, बहनों, भाइयों और महबूबाओं के दरमियानइंसानों के दरमियानमैं ने देखाइन तारीफों, तआरुफ़ों और ताज़ियतों के लिएउन के पास लरज़ते हुए होंट हैंडबडबाई हुई आँखें हैंगर्म हथेलियाँ हैंउन्हें किसी इबलाग़ की ज़रूरत नहींनान-बाई गुनगुनाता हैउसे लफ़्ज़ नहीं चाहिएएक नान्द... आटा गूँधने के लिएएक तख़्ता... पेड़े बनाने के लिएएक सलाख तन्नूर से रोटी निकालने के लिएनान-बाई का काम ख़त्म कर लो तो मेरे पास आनायहाँ किनारे पर सरकंडों का जंगल आप ही आप उग आया हैकुछ क़लम मैं ने तराशे हैंऔर एक बाँसुरी...बाक़ी सरकंडों से एक कश्ती बनाई हैगडरिया, किसान, काश्तकार, माैसीक़ार, आहन-गरसब तय्यार हैंकुछ आवाज़ें कश्ती में रख ली हैंमदरसे की घंटी...एक लोरीऔर एक दुआएक नई ज़मीन पर ज़िंदा रहने के लिए इस से ज़ियादा कुछ नहीं चाहिए
पीछे पीछे आ रहा है कौन ये क्या बात हैबज रहे हैं कान उफ़ कैसी भयानक रात है
क्या पैरों की थकन इस सफ़र को रोक सकती हैक्या रास्ते के रोड़े मेरे इरादे को तोड़ सकते हैंक्या मैं यहाँ से वापस लौट जाऊँगाक्या मैं और आगे चल नहीं पाऊँगानहीं नहींशायद मुझे जाना है बहुत दूरगो हूँ मैं थकन से चूरऔर बे-ज़ार हर मंज़र सेजो बार बार लौट कर नज़र की उकताहट बन जाता हैवही आसमानवही ज़मीनवही चाँद वही सितारेचाँदनी में चमकते और महकते वही फूलहाथों में चुभते वही बबूलवही मेरे मन को सलाख़ों में लहू करने वाले अक़वाललेकिन शायद उकताहट भी माने न होक़दमों कीशायद ज़िंदगी क़ैदी न बने लम्हों कीये तो हवा-ए-बर्ग-ओ-बार की तरह हैजो कभी न कभी गुज़र जाएगीमेरे ज़ेहन के ख़ज़ाने की ऊपरी सतह को भीकभी न छू पाएगीशायद अभी आगे बहुत दूर जाना हैऔर इन बार बार आते लम्होंहर बार आँख के सामने उभरते मंज़रोंदरियाओं सहराओं जंगलोंगाँव और शहरोंके भीड़ से मुझे कोई नया रंगनिकालना होगाअपने परागंदा ज़ेहन को क़ब्र में दफ़्न कर केनया बुत नया मंदिर बनाना होगापुराने लफ़्ज़ों से नया लफ़्ज़पुराने मआ'नी से नए मआ'नीख़ल्क़ करने होंगेयही नहींमुझे पारीना कानों मेंसमाअ'तों के नए पैमानेआँखों के लिएनए मंज़र-नामे से तरतीब देने होंगेचलते चलते मेरे जूते भी घिस गए हैंमुझे उफ़ जूतों को ही बदलना होगाऔर आँखों पर नई ऐनक लगानी होगीताकि पुराने शीशे में नए रंगपुराने न दिखाई देंशायद ये थकन मुझे रोक न पाएशायद मैं इन रोडों को फलाँग दूँशायद अपने हाथों से बबूलों को नोचफेंकूँशायद मैं सिन की सलाख़ों को तोड़ करबाहर आ जाऊँऔर मल्गजी चाँदनी के अक्स घरअपने लहू से सुर्ख़-रू कर दूँऔर क़दम बढ़ाते आगे निगल जाऊँशायद मुझे अभी बहुत दूर जाना है
इंजीनियरलिख पढ़ के मैं तो इक दिनअहल-ए-हुनर बनूँगाचाहा अगर ख़ुदा नेइंजीनियर बनूँगाहोगी मिरे हुनर से ता'मीर इस वतन कीजागेगी मेरे फ़न से तक़दीर इस वतन कीचलती रहें मशीनें सनअ'त तमाम चमकेजिस तरह सुब्ह चमके वैसे ही शाम चमकेअहल-ए-हुनर बनूँगाइंजीनियर बनूँगाडॉक्टरजिसे तकलीफ़ में पाऊँउसे आराम पहुँचाऊँजहाँ ग़म का अंधेरा होख़ुशी की रौशनी लाऊँजहाँ आँसू बरसते होंहँसी उस घर में बिखराऊँदुआ है डॉक्टर बन करदुखी लोगों के काम आऊँवतन का सिपाहीवतन का बहादुर सिपाही बनूँशुजाअ'त की दुनिया का राही बनूँलेफ्ट राइट लेफ्टलेफ्ट राइट लेफ्टवतन में जहाँ हो ज़रूरत मिरीवहीं काम आए शुजाअ'त मिरीदिलेरी का मैं सब को पैग़ाम दूँजो मुश्किल हो वो काम अंजाम दूँहमेशा तरक़्क़ी की राहों में हमचलें साथियों से मिला के क़दमलेफ्ट राइट लेफ्टलेफ्ट राइट लेफ्टटीचरना चाँदी ना सोना चाहूँमैं तो टीचर होना चाहूँहासिल जो ता'लीम करूँ मैंसब में उसे तक़्सीम करूँ मैंनन्हे मुन्ने बच्चे आएँइल्म की दौलत लेते जाएँकम न हो ये तक़्सीम किए सेजलता हो जैसे दिया दिए सेपायलटबुलंदी पे जा के सफ़र करने वालाहवा-बाज़ ऊँचा हवा-बाज़ आ'लावो रनवे पे आया जो टेक-ऑफ़ करनेतो सूरज ने पहनाई किरनों की मालापैसेंजर हैं सीटों पे बे-फ़िक्र बैठेउड़ाए लिए जा रहा है जियालाहमारी उमंगों से क्या कह रहा हैफ़ज़ाओं में उड़ता हुआ ये उजालावकीलइंसाफ़ की शान दिखाऊँइंसाफ़ का रंग जमाऊँमज़लूम से हो हमदर्दीज़ालिम को सज़ा दिलवाऊँमुजरिम के काले दिल मेंक़ानून की शम्अ' जलाऊँहर बात में सब से आगेइंसाफ़ की बात बढ़ाऊँइंसाफ़ की शान दिखाऊँइंसाफ़ का रंग जमाऊँहारीसोचा है मैं नेहारी बनूँगाखेतों में झूमूँगंदुम उगा केधरती को चूमूँफ़स्लें सजा केसारे वतन कोख़ुश-हाल कर दूँख़ुशियों से सब केदामन को भर दूँहारी बनूँगा
इस ख़बर के आने के ब'अदमैं अपने घर की खिड़कियाँबंद करती हूँबिजली के तार स्विच-ऑफ़ कर देती हूँफ्रीज़ में रखा खानापड़ोस में दे देती हूँबचा हुआ दूध गली की बिल्ली के आगेडाल देती हूँऔर एक गिलास ठंडा पानी पीती हूँतमाम दरवाज़े लॉक कर केसड़क पर निकल जाती हूँदोपहर से पहलेया रात के किसी पहरसरकारी गाड़ी मेंसरकारी मुर्दा-ख़ाने मेंमुझे बाक़ी जिला-वतनों के साथफेंक दिया जाएगाऔर एक ख़बर छपेगीमुल्ज़िमा फुलाँ-बिंत-ए-फुलाँ के घरपुराने संदूक़ मेंपुराने कपड़ों की तहों मेंबहुत सी नज़्मेंक़ाबिल-ए-ए'तिराज़ हालत में पाई गईं
गुड़िया की आँख फोड़ीगुड्डे की टाँग तोड़ीवो हम पे हँस रही थीगर्दन ज़रा मरोड़ीमुन्नी ने की शिकायतयूँ हम ने मार खाईअम्मी ने की पिटाईस्कूल से तो भागेडाले गले में बस्ताराजू के साथ देखाबंदर का बस तमाशाघर पर ये बात पहुँचीहम ने न की पढ़ाईअम्मी ने की पिटाईहलवे की बात छोड़ोक्या सेब का मुरब्बारस-गुल्ले और बर्फ़ीमक्खन का सारा डब्बाजो चीज़ भी कि देखीहम ने चुरा के खाईअम्मी ने की पिटाईसब सामने थे बैठेढेंचूँ का राग गायापापा के दोस्तों कोफिर हम ने मुँह चिढ़ायाइतनी सी दिल लगी परशामत हमारी आईअम्मी ने की पिटाईभय्या तो सो रहे थेपंखे को ऑफ़ कर केहम हो गए रवानाजेबों को साफ़ कर केछोटी सी ये शरारतहम को न रास आईअम्मी ने की पिटाई
या मैंजदीद हिफ़्ज़ान-ए-सेहहत के उसूलों के मुताबिक़पैक किया हुआ टिन गिलास हूँजो किसी वक़्त और किसी मक़ाम परप्यास बुझाने के बादडिस्पोज़ ऑफ़ किया जाएगा
इस के अंदर ज़िंदगी की क़द्र करते हो तलाशऔर लिए फिरता है भाई दूसरे भाई की लाशतर्ज़-ए-नौ की शाएरी हो जाए जब बेहद बलीग़लोग कहते हैं कि पैदा हो गया अदब-ए-लतीफ़तर्ज़-ए-नौ की शाएरी के देखिए मौज़ूअ भी''हुर्रियत'' ''निस्वानियत'' ''एहसास'' ''मुफ़्लिस का शबाब''''चाँदनी रातें'' पपीहा, ''तू कहाँ'' ''सरमाया-दार''''बुरजवा क़द्रें'' ''महाजन'' ''ज़िंदगी के मोड़ पर''''मोरचा मख़मल में देखा आदमी बादाम में''''टूटी दरिया की कलाई ज़ुल्फ़ उलझी बाम में''तर्ज़-ए-नौ की शाएरी में मद्द-ओ-जज़्र-ए-बहर-ए-शेरउफ़ ग़ज़बएक मिस्रा फ़ील-ए-बे-ज़ंजीर की ज़िंदा मिसालदूसरा उश्तर की दुम
वाजिब है वालदैन का हर हाल में अदबउफ़ भी ज़बाँ पे आए तो तौबा किया करो
मिरी बेटी मिरी जानाँतुम्हें सब याद तो होगाबहुत पहले बहुत पहलेजवानी का था जब आलममिरे बाज़ू में ताक़त थीमिरे सीने में हिम्मत थीउन्हें अय्याम में इक दिनमिरी आग़ोश-ए-उल्फ़त मेंकिसी ने ला के रक्खा थातुम्हारा फूल सा चेहराबदन बे-इंतिहा नाज़ुकमिरे इन सख़्त हाथों मेंअजब नर्मी सी आई थीमिरी इस आँख ने बू से लिए थे और रोई थीमुझे तो याद है सब कुछतुम्हें भी याद तो होगानए कपड़े खिलौने दूध की बोतल ख़रीदी थीबहुत बेचैन होता था जो तुम रातों को रोती थींचली थीं अपने पैरों पर जो तुम पहले-पहल बेटामुझे ऐसा लगा था चल पड़ी दिल की मिरे धड़कनक़दम दो चार ले कर तुम जो इक-दम लड़खड़ाई थींमिरी साँसें मिरे सीने के अंदर थरथराई थींमिरी गोदी में रफ़्ता रफ़्ता दिन गुज़रा किए और तुमन जाने सोते सोते मेरे सीने पर जवानी तकमिरी जाँ आज आई होतुम्हें मुझ से शिकायत हैकि मैं ने सख़्तियाँ की हैंमिरी वो सख़्तियाँ तुम को बहुत रंजूर करती थींमुझे भी रंज होता थामगर थी तर्बियत लाज़िमतुम्हें साँचे में ढलना थातबीअ'त को बदलना थातुम्हें सब याद तो होगामिरी बेटी मिरे बाज़ू में वो क़ुव्वत नहीं बाक़ीतुम्हारी हर ख़ुशी की हैं ज़मानत धड़कनें मेरीमगर इक मशवरा सुन लोकि अब सब भूल जाओ तुमनए रिश्ते बनाओ तुमहमारा साथ छूटेगानए रिश्तों के मेरी जाँ मसाइल कम नहीं होगेमगर तब हम नहीं होंगेअकेली जान होगी तुमफ़क़त वो तर्बियत होगीजो मैं ने सख़्तियाँ कर केतुम्हारे दिल में डाली हैवो तुम को याद तो होगीसबक़ सब याद तो होगा
शाम शाम जैसी थी रास्तों पे हलचल थीकाम करने वाले सबअपना फ़र्ज़ अदा कर केअपने अपने मैदाँ सेकुछ थके तो कुछ हारेअपने घर को जाते थेभीड़ थी दुकानों परघर को लौटने वालेअगली सुब्ह की ख़ातिररुक के माल लेते थेहर किसी को जल्दी थीऔर शाम ढलती थीएक हम थे आवाराकल न था कोई सौदाइस लिए सड़क पर हमधीरे धीरे बढ़ते थेभागते हुए लोगों पर निगाह करते थेऔर उन पे हँसते थेअपनी मस्तियों में गुमबे-नियाज़ दुनिया सेआगे बढ़ रहे थे हममुस्कुरा रहे थे हमलेकिन एक मंज़िल परहम ठिठक गए इक दमएक अजनबी लड़कीहम पे इक नज़र कर केख़ूब ख़ूब हँसती थीमुँह को फेर लेती थीफिर पलट के वो हम को देखती थी हँसती थीजाने अपने जैसों परउस की खिलखिलाहट नेकौन सा असर डालाकिस ने जाने क्या सोचाकिस ने जाने क्या समझाहै ख़बर मुझे अपनीमेरी मस्तियाँ सारीशाम के धुँदलके मेंदूर होती जाती थींख़ुद पे शर्म आती थीऔर वो शोख़ सी लड़कीहम पे हँसती जाती थीअब मिरी निगाहों को अपना ध्यान आया थाअजनबी सी लड़की ने दिल बहुत जलाया थाअब मैं ज़ात का अपनी ख़ुद तवाफ़ करता थाअपने अक्स को अपने आइने में तकता थाअब नियाज़-मंदी थी मेरी बे-नियाज़ी मेंअब वो अजनबी लड़कीदूसरे इक आवारापर निगाह करती थीउस को देख कर फिर वोबे-पनाह हँसती थीवो अजीब लड़की थी वो अजीब लड़की थी
आज तारीकी-ए-शब हद सिवा लगती हैजाने क्या बात हुई है कि घुटन होती हैगो कि इक उम्र गुज़ारी है इसी ज़िंदाँ मेंनीम-तारीक से इस गोशा-ए-वीराँ से मिरीऐसा लगता है कि देरीना शनासाई हैउस की दीवारों पे लिक्खे हैं कई अफ़्सानेजिन में दिल-गीर तमन्नाओं की गहराई हैउस की बे-जान ज़मीं ने मिरी आँखों में बहुतख़ुश्क सीने के लिए आब-ए-बक़ा पाया हैउस की मख़दूश शिकस्ता सी छतों ने अक्सरशब ढले नाला-ए-दिल-गीर को दोहराया हैउसी ज़िंदान के रौज़न ने सहर के क़िस्सेमेहरबाँ हो के मिरे हाल पे दोहराए हैंअब ये आलम है कि गर्दन का है हमराज़ ये तौक़बेड़ियाँ हैं मिरे पैरों की सहेली अब तोअब तो ज़ंजीर की झंकार में लुत्फ़ आता हैअब ये परवाना रिहाई का जला दो तो सहीउसी ज़िंदाँ को मिरी क़ब्र बना दो तो सहीताक़ की शम-ए-तअ'ल्लुक़ भी बुझाओ तो सहीउस से कह दो कि रिहाई नहीं होने वालीमुझ में ज़िंदाँ में जुदाई नहीं होने वालीलज़्ज़त-ए-वस्ल उसे अब नहीं मिलने वालीदिल गई रात सहर अब नहीं होने वाली
उन से कहना कि वोअपनी इस जंग मेंअब अकेले नहींआज की जंग सब की हैऔर सारे वक़्तों की हैअपने अपने महाज़ों की दहलीज़ परहम भी मोरचा-बंद और सफ़-ब-सफ़ उन के हम-दोश हैंहम कि ख़ामोश हैंहम कि ख़ामोश हैं केतली का तलातुम नहींचीख़ने के हुनर-शनासा नहींबे-महल हल्क़-बाज़ोंअँधेरे के अफ़-अफ़-ज़नों की तरहउन से कहनाकि हम लम्हे लम्हे के हमरा धड़कते हुएअपने होने की हर शक्ल परख़ुद गवाही बनेआज की जंग मेंउन के हम-दोश हैंऔर सर-ए-सीना-ओ-दोश ताँबा ना लोहा मगर हम निहत्ते नहींअम्न भी हैं मोहब्बत भी हमरज़्म भी दर्स-ए-इबरत भी हमसिद्क़ के ज़ोर सेफ़िक्र की काट और दर्द की धार से लैस शमशीर-ए-ख़ामा सिपर-ए-लौह हमउन से कहनाकि जो आज की जंग वो लड़ रहे हैंवो सब की है और सारे वक़्तों कीऔर उन की तरहहम भी इस जंग मेंअपने अपने महाज़ों पे परचम-कुशाइन के हम-दोश हैंअपने आदर्श की चौकियों के निगह-दार ग़ाफ़िल नहींगरचे ख़ामोश हैं
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