aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "faraaz"
विसाल-ए-जाँ-फ़ज़ा तो क्याफ़िराक़-ए-जाँ-गुसिल की भी
मुझ से पहले तुझे जिस शख़्स ने चाहा उस नेशायद अब भी तिरा ग़म दिल से लगा रक्खा हो
उस ने कहासुन
मिरे ग़नीम ने मुझ को पयाम भेजा हैकि हल्क़ा-ज़न हैं मिरे गिर्द लश्करी उस के
ये मेरी ग़ज़लें ये मेरी नज़्मेंतमाम तेरी हिकायतें हैं
मियान-ए-शाख़-साराँ सोहबत-ए-मुर्ग़-ए-चमन कब तकतिरे बाज़ू में है परवाज़-ए-शाहीन-ए-क़हस्तानी
बहुत ख़ूब-सूरत हो तुम बहुत ख़ूब-सूरत हो तुमकभी मैं जो कह दूँ मोहब्बत है तुम से
तुम अपने अक़ीदों के नेज़ेहर दिल में उतारे जाते हो
हम ख़्वाबों के ब्योपारी थेपर इस में हुआ नुक़सान बड़ा
फ़क़त तुम्हीं को नहीं रंज-ए-चाक-दामानीकि सच कहें तो दरीदा-लिबास हम भी हैं
दिल-ए-तूर-ए-सीना-ओ-फ़ारान दो-नीमतजल्ली का फिर मुंतज़िर है कलीम
मिले तो हम आज भी हैं लेकिनन मेरे दिल में वो तिश्नगी थी
तुझ से बिछड़ कर भी ज़िंदा थामर मर कर ये ज़हर पिया है
उम्रों की मसाफ़त सेथक-हार गए आख़िर
मैं कि दो रोज़ का मेहमान तिरे शहर में थाअब चला हूँ तो कोई फ़ैसला कर भी न सका
अब मिरे दूसरे बाज़ू पे वो शमशीर है जोइस से पहले भी मिरा निस्फ़ बदन काट चुकी
और उस के दामन में फ़क़तहमदर्दियों के फूल हैं
अभी हम ख़ूबसूरत हैंहमारे जिस्म औराक़-ए-ख़िज़ानी हो गए हैं
हुज़ूर आप और निस्फ़ शब मिरे मकान परहुज़ूर की तमाम-तर बलाएँ मेरी जान पर
किस से डरते हो कि सब लोग तुम्हारी ही तरहएक से हैं वही आँखें वही चेहरे वही दिल
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