aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "fry"
सिसकी और क़हक़हामैं अपने पाँव तले से जन्नत निकाल करबड़ी ख़ुशी से तुम्हें सौंपने के लिए तय्यार हूँमैं अपने पाँव में बंधी गृहस्ती की बेड़ियों कोबस थोड़ा सा ढीला कर रही हूँज़ियादा दूर नहीं जाऊँगीएक क़हक़हा लगा कर एक सिसकी भर करया एक नज़्म लिख कर लौट आऊँगीमैं आज़ाद औरत हूँ लेकिनअगर मेरे बच्चों के बालों में लीखें पड़ जाएँउन की गर्दन पर पसीना मिली मिट्टी नज़र आएमेरे खानों में मसालहों की तरतीब गड़बड़ हो जाएबच्चों के होम-वर्क की कॉपी परनॉट-डन लिखा हुआ आ जाएघर आए मेहमानों को ख़ुश-आमदीद कहते हुएएक कप चाय भी न पिला सकूँऑफ़िस से लौटते हुए थके हुए शौहर सेहाल-अहवाल भी न पूछूँतो मेरी साँसें घुट्टी हुईऔर क़हक़हा फटी फटी आँखेंऔर नज़्म अधूरा ख़्वाब लगती हैख़ुदा ने नबुव्वत अता करते हुए इमाम बनाते हुएपूरी क़लंदरी अता करते हुएमुझ पर ए'तिबार नहीं किया थापूरी क़ौम को आ'ला नस्ल देने की ज़िम्मेदारीफ़क़त मेरी हैइस आ'ली मंसब पर काम करते करतेमैं थक भी तो सकती हूँमेरी इत्तिफ़ाक़ी रुख़्सत मंज़ूर हो चुकी हैमैं जा रही हूँ एक सिसकी भरने एक क़हक़हा लगानेऔर एक नज़्म लिखने के लिएछुट्टी अख़लाक़ी तौर पर मंज़ूर होने के बावजूदघर की हर चीज़ को मुझ से शिकायतक्यूँ हैबच्चों के चेहरे पर ग़ुस्सा देख कर सोचती हूँक़हक़हा अय्याशी और सिसकी या आस हैऔर नज़्म पाँव में चुभा हुआ काँच का टुकड़ा हैमेरी माँ कहती हैतुम मुझ से अच्छी माँ नहीं होतुम अजब हो घर शौहर और बच्चों के अलावाऔर भी कुछ चाहती होमेरी बेटी मेरे हाथ से क़लम छीन करकहती है फ़्रैंच-फ्राई बना कर दोमैं सोचती हूँमेरी बेटी को भी जबएक क़हक़हे नज़्म या तस्वीर के लिएअपनी ज़िंदगी की तिजोरी सेकुछ पल दरकार होंगेतो मैं उसे क्या मशवरा दूँगीक़हक़हा बचपन की बिछड़ी हुई सखीसिसकी हाथों से उड़ता हुआ पंछीऔर नज़्म गुनाह है
झलक तो देखो हमारे घर की यहाँ हैं नानी यहाँ हैं ताईहमारे माँ बाप और चचा हैं यहाँ हैं बहनें यहाँ हैं भाईहमारा घर है हसीन गुलशन ख़ुशी की कलियाँ खिली हुई हैंवफ़ा की ख़ुश्बू बसी हुई है हुई न होगी यहाँ लड़ाईहमारे अब्बू की देखो अज़्मत हर एक कुर्ता है इन की इज़्ज़तनज़र में इन की हैं सब बराबर इन्हीं से मिलती है रहनुमाईकमा रहे हैं हलाल रोज़ी बना दिया है हमें नमाज़ीइन्हीं से घर में है ख़ैर-ओ-बरकत किसी की करते नहीं बुराईहमारी अम्मी हैं नेक सीरत हमें मिली है इन्हीं से राहतसदा किचन में है काम उन का पका रही हैं चिकन फ्राईलबों पे उन के सदा तबस्सुम ज़बान उन की है ख़ूब शीरींनहीं है कामों से उन को फ़ुर्सत कभी सफ़ाई कभी सिलाईहमें है उन से दिली मोहब्बत उन्हीं के क़दमों तले है जन्नतबड़ी मोहब्बत से परवरिश की है उन की फ़ितरत में पारसाईअजीब शय हैं चचा हमारे नहीं किसी की समझ में आएलिए हैं प्याले में मुर्ग़ छोले उसी में डाली है रस-मलाईजो मूड हो तो सुनाएँ नामा ठुमक ठुमक कर बजाएँ तबलागए वो इक रोज़ छत के ऊपर वहाँ चचा ने पतंग उड़ाईमदद वो अम्मी की कर रहे हैं तवे पे चमचा चला रहे हैंसवेरे उठ कर चचा हमारे गली की करते हैं ख़ुद सफ़ाईवो सैर करने गए हैं बाहर पहन के बनयान और लंगोटीबड़ी सी पगड़ी है सर के ऊपर लटक रही है गले से टाईबड़ी हैं सब से हमारी नानी सुनाती हैं वो हमें कहानीज़बाँ पे ज़िक्र-ए-ख़ुदा है जारी ठिकाना उन का है चारपाईडकारती हैं हमारी ताई हमेशा पीती हैं वो दवाईबड़ा सा तकिया है सर के नीचे बदन के ऊपर है इक रज़ाईबड़ी बहन का है नाम रज़िया वो नॉवेलों की बहुत है रसियाकशीदाकारी में है महारत मज़े से खाती है वो मिठाईबहन सुरय्या ने लाया गुड्डा बहन रुक़य्या ने लाई गुड़ियासहेलियों को बुला के शादी ख़ुशी से दालान में रचाईहमारा अनवर है दस बरस का मुसव्विरी से उसे है रग़बतबना के तस्वीर जब दिखाई तो भाई बहनों से दाद पाईहै सब से छोटा मियाँ मुनव्वर मगर है ता'लीम से मोहब्बतदवात ले कर वो लिख रहा था गिरा दी कपड़ों पे रौशनाईज़रा सा अपना भी हाल कह दूँ मैं एक कॉलेज में पढ़ रहा हूँकिताब से मेरी दोस्ती है कभी न छोड़ूँगा मैं पढ़ाई
आओ लॉन में बैठेंशाम का सूरज देखेंज़र्द ख़िज़ाँ की सरगम सेजी को बहलाएँजंगल को इक गीत सुनाईंसुर्ख़ सुनहरेपेड़ से गिरतेदर्द के पत्तेहाथ में ले करउन की रेखाओं को देखेंपत्तों को चुटकी में घुमाएँअपने अपने हाथ की दोनों पढ़ें लकीरेंइक दूजे की आँखों की गहराई में उतरेंफूल सजे हैं जो गुल-दान में मेज़ के ऊपरउन को चूमेंदूध के जैसे उजले कपों मेंकेतली से तुम चाय उन्डेलोबिना शकर और बिना दूध की चाय सुनहरीअच्छी लगती है जब प्यार की बात करेंमाज़ी के क़िस्से दोहराएँहँसते हँसते आँखों में आँसू आ जाएँइन बातों से चाय मीठी हो जाती हैआओ लॉन में बैठेंचीनी चाय पिएँ हम
बदमस्त हो गए हो इलेक्शन में 'जाफ़री'सर में नशे के साथ है साैदा-ए-रहबरीतुम कस जगह के पंच हो क्या है बिरादरीक्यूँ ढूँडते हो मुल्क में जो वोट हो फ़्रीतुम होश में नहीं हो तो है बात दूसरीये कह के घर में बैठ रहो मैं नशे में हूँ
ये बे-रहम चोटों ख़सारों की दुनियाये काग़ज़ के झूटे सहारों की दुनियाये रूपयों के लालच के मारों की दुनियाये रुपया अगर मिल भी जाए तो क्या है
जंगल के गहरे साएनज़दीक आ रहे हैंवहशी परिंदे हर सूसीटी बजा रहे हैं
हैरान हूँये कौन सा शहर है'मीर'-ओ-'ग़ालिब' की दिल्ली कभी ऐसी तो न थीहर गली हर नुक्कड़ पर साँप कुंडली मारे बैठे हैं यहाँपैदा होते ही कोई भी सँपोलाडसने के लिए पर तोलने लगता हैजिधर देखिएहर जगह साँप ही साँप हैंकहीं ख़ूनी दरवाज़े के अक़ब सेतो कहीं धौला-कुआँ के फ़्लाई ओवर परहर जगह कुंडली मारे हुए यहाँहज़ार-हा साँप ऐसे हैंजो हर दम तय्यार बैठे हैंमौक़ा मिलते हीवो किसी भी नर्म-ओ-गुदाज़ बदन कोनिशाना अपना बना लेते हैंअपने ज़हरीले दाँत गाड़ ने के लिएजब वो फनफना कर बाहर आते हैंकिसी भी राहगीर का रस्ता रोकेएक दमतन के खड़े हो जाते हैंहत्ता किबूढ़ा नाग भी अब यहाँअपने खंडर में तन के खड़ा हैउसे भी इंतिज़ार हैबरसात की उस काली अँधेरी रात का हैजब वो बुल-हवसअपने कोहना-मश्क़ दाँतों कोकिसी नर्म-ओ-नाज़ुक ग़ज़ाला परतेज़ कर सके हमला-ए-ख़ूँ-रेज़ कर सकेअपनी उम्र के इस आख़िरी पड़ाव में वो बुल-हवसकोई वारदात-ए-जुनूँ-अंगेज़ क़यामत-ख़ेज़ कर सकेया ख़ुदाये कौन सा मक़ाम हैक्या ये तेरा क़हर नहीं हैक्या ये वही पुराना शहर नहीं हैसोचता हूँ'मीर'-ओ-'ग़ालिब' की दिल्ली कभी ऐसी तो न थी
अच्छी है हर चीज़ खरी हैएक ख़रीदो एक फ़्री है
क्या रूमानी लम्हा थाशोअ'रा पर ये शर्त लगी थीछत पर पूरा चाँद देख करसब को नज़्म सुनानी होगीपूरे चाँद को तकते तकतेमैं ने भी इक नज़्म सुनाईमेरे लिए वो नज़्म नहीं थीबेल कोई अंगूर की थीजिस ने मेरा ख़ून पिया थाचाँद ने लेकिन शे'र सुने तोवो बेहद मसहूर हुआ थाऐसा लगा कि उस के तन सेछलबल उड़तीधूल सुनहरीसुनने वालों की पलकों पर आ बैठी होलोगों ने यूँ दाद मुझे दीगोया चाँद के कॉपीराइट मेरे हूँमैं ने अपनी नज़्म सुनाई उर्दू मेंक्या रूमानी लम्हा था
ख़ुदा को काम करना हैख़ुदा को काम करने दोये जो शैतान की रस्सी को उस ने ढील दी हैएक मंसूबा है उस कायक़ीनन आसमाँ मेंउस ने अपने एप्स कुछ ऐसेबनाए हैंजिन्हें बर-वक़्त डाउन-लोड होना हैवो सुब्ह अनक़रीब आएगीजब उस का फ़रिश्ता सूर फूँकेगाअभी जो मुट्ठियों को भींच करतक़रीर करते हैंफ़ज़ा में मोटे मोटे हाथ लहरा करतुम इक दिन देख पाओगेतुम्हारा रबलबों को सी के किन इक़दाम की तय्यारियों में थावो हर्फ़-ए-हक़ को साबित कर के छोड़ेगाइन अहल-ए-शर के क़दमों से ज़मीं सरकेगीऔर उन की मोटी मोटी मुट्ठियों सेधोंस की मिट्टीरेत की मानिंद झड़ जाएगीबहुत बे-ताब मत हो तुम ज़रा ठहरोवो दिन आएगा जब तुम देख पाओगेये सब चौपायों का पेशाब-ओ-गोबर बेचते रह जाएँगेतुम्हारे पास शहरियत के काग़ज़ आप पहुँचेंगेतुम दूध में डुबकी लगाओगेख़ुदा को काम करना हैख़ुदा को काम करने दो
सुनो चुन्नू मुन्नू मिरे पास आओशकीला जमीला को भी साथ लाओये देखो मिरे पास क्या आ गई हैये छोटी सी डिबिया बड़े काम की हैये डिबिया नहीं मंतरों की छड़ी हैसुनो इस में जादू की पुड़िया पड़ी हैइसे जब घुमाव तो दुनिया घुमाएये घर बैठे बैठे सियाहत कराएइसे खटखटाओ तो घुँघट उठाएहमें चाँद सी अपनी सूरत दिखाएइसे जब दबाओ तो ये गुनगुनाएअनोखे निराले धुनों को सुनाएबिना कुछ दबाए भी ये बोलती हैबिना कुछ हिलाए भी तो डोलती हैज़रूरत हो जिस की इसे ये बुला देबुला कर उसे हम से बातें करा देहमें अपने बिछड़ों से हम को मिला देहमारे दिलों में मोहब्बत जगा देये चाहे तो जिस से भी जिस को मिला देकिसी को किसी से भी चाहे भिड़ा देकभी अजनबी को भी साथी बना देकभी दोस्त को भी ये दुश्मन बना देकभी जो शरारत ये करने पे आएतो चाहे जिसे रात दिन ये सताएतिलिस्मी फ़ज़ाएँ भी इस में छुपी हैंहज़ारों बलाएँ भी इस में दबी हैंकभी तो ये दुनिया का नक़्शा उभारेकभी आसमाँ को ज़मीं पर उतारेकहाँ क्या हुआ सारा क़िस्सा सुनाएयहाँ का वहाँ का तमाशा दिखाएये मशरिक़ को मग़रिब से पल में मिलाएबस इक आन में दूरियों को मिटाएये फोटो भी तो बैठे बैठे उतारेहमारे भी चेहरे का नक़्शा उभारेये देखो तुम्हारा भी फोटो खिंचा हैतुम्हारे भी चेहरों का नक़्शा बना हैनहीं वक़्त का सिर्फ़ चक्कर चलाएये डिबिया तो तारीख़ दिन भी बताएअलार्म भी तो रात में ये बजाएहमें वक़्त पर ग़फ़लतों से जगाएमिरे दिल में क्या है इसे ये ख़बर हैमिरे दिल के अंदर भी इस की नज़र हैइलह-दीन का ये दिया तो नहीं हैकि इस में भी तो कोई जिन सा बसा हैकि जब भी बुलाओ तो देखो खड़ा हैजो शय चाहिए इस से हाज़िर किया हैछड़ी की झड़ी देख बच्चे ये बोलेबहुत देर के बाद मुँह अपना खोलेये डिबिया तो सच-मुच बड़े काम की हैहमें भी बताओ कहाँ से मिली हैबताओ कि इस का कोई नाम भी हैफ़्री में मिली है या कुछ दाम भी है
क्या ग़ज़ब की बारिश हैआँखें सूजने आईंकाश कोई वाईपरचलती कार से ले करमेरे उन पपोटों परजोड़ दे सफ़ाई सेपुतलियों के शीशों कोधुँद से बचाना है
रात के आख़िरी पहरमैं ने मुक़द्दस फ़्लाई की सरहद पेपाँव रखाउस के सब्ज़ पैरहन की ख़ुश्बूमेरे इस्तिक़बाल के लिए मौजूद थीमेरे ख़ाक-आलूद घुटनों नेज़मीन की खुशबू-दार नाफ़ को छुआतो मैं नेअपना मल्बूस चाक कर डाला
फ़ोम के बिस्तर पर इक दीवार उठा दी वक़्त नेअजनबी ना-आश्ना ख़ामोश से रहने लगेहाथ से काढ़े हुएदोनों तकियों के ग़िलाफ़बंद हैं आँखों में बातेंक़त्ल होंटों का मिलापवक़्त तुझ को दूँ भला मैं कौन से लफ़्ज़ों में शापजा तुझे सौ ख़ूँ मुआ'फ़
पिछले दो तीन साल से अक्सरघर में इक इश्तिहार देखता हूँजिस में लिखा हैये जो हैं तीन लफ़्ज़ अंग्रेज़ीआज तक ये समझ में आ न सकाहैं ख़ुदा के लिए कि मेरे लिएमैं तो मफ़्हूम उन का पा न सकाक्या ख़ुदा देखता है ज़ी टी वीरोज़ जब रात घर पहुँचता हूँसूनी जेबों को मैं टटोलता हूँमेरी बीवी की आँखें पूछती हैंआज भी ज़िंदगी ने कम ही दियालो तुम्हारी ये नींद की गोलीइक नई नज़्म कह के सो जाओ
मिरी मेज़बाँ नेहवाई सफ़र मेंचमक अपनी आँखों में लाते हुएबा-ज़बान-ए-ख़मोशी ये मुझ से कहा थाहवाई मुसाफ़िरज़मीं पर नहीं हमख़ला का सफ़र है दरीचे न खोलो
असर अनोखा हुआजब आस्तीं का बटन गिर के खो गया जानाँतुम्हारी याद का सीना हज़ार चाक हुआवो एक नूर का धागा ध्यान में आयाकसा हुआ सा कोई तार साज़ का जैसेलगा के पेच कई दिल को बाँधने की अदागुलाबी होंटों से हो कर गुज़रने वाली डोरतुम्हारे दाँतों से क्या पट से टूट जाती थीकुशादा आँखों के गोशों से सर उबलते थेअब ऐसे बाँसुरी पे कोई लब नहीं रखतातुम्हारी तरह बटन और कौन टाँकेगाबस एक साँस की सूई है ज़ख़्म सीती है
घर के बाहरबारिश है या धूप है या ओले बरसे हैंकुछ मत सोचोजब तक घर के अंदर हो आराम से बैठोफ़िक्र कहाँ की घर में हो नागर्मा-गर्म पकौड़े खाओघर का मज़ा लोगंजी मोज़ों लुंगी की शाहाना राहतपाबंदी की भागती दौड़ती इस दुनिया मेंमज़दूरों को कम मिलती है
Devoted to the preservation & promotion of Urdu
A Trilingual Treasure of Urdu Words
Online Treasure of Sufi and Sant Poetry
World of Hindi language and literature
The best way to learn Urdu online
Best of Urdu & Hindi Books