aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "ghaaT"
कुछ लफ़्ज़ जिन्हें मअनी न मिलेकुछ गीत शिकस्ता-जानों के
ज़माने के अंदाज़ बदले गएनया राग है साज़ बदले गए
तबले मजीरे दाएरे सारंगियाँ बजागाते हैं आदमी ही हर इक तरह जा-ब-जा
बंदगी में घट के रह जाती है इक जू-ए-कम-आबऔर आज़ादी में बहर-ए-बे-कराँ है ज़िंदगी
सद-नाज़ से उतरा करती थीसहबा-ए-ग़म-ए-जानाँ की परी
याद की राहगुज़र जिस पे इसी सूरत सेमुद्दतें बीत गई हैं तुम्हें चलते चलते
मैं अपने तौर तुम्हें इस्तिमाल करता हूँये ज़िंदगी है यहाँ घात में है हर कोई
जब अपने हसीं घर की दहलीज़ पर जा रुकेगीतो मुख मोड़ कर मुस्कुराएगी जैसे
आँख खुल गई मेरीहो गया मैं फिर ज़िंदा
सारी नफ़रतें बह जाएँगंगा घाट पर अगर मन भी नहलाएँ
हर आन घड़ी गत भरते हों कुछ घट घट के कुछ बढ़ बढ़ केकुछ नाज़ जतावें लड़ लड़ के कुछ होली गावें अड़ अड़ के
घट चुकी होगीतुम्हारे जिस्म का सूरज पिघल चुका होगा
जमुना-जी के पाट को देखाअच्छे सुथरे घाट को देखा
बूंदों की झमझमावट क़तरात की बहारेंहर बात के तमाशे हर घात की बहारें
ये धज न दे जो अजंता की सनअतों को पनाहये सीना पड़ ही गई देव लोक की भी निगाह
3ये रस का सेज ये सुकुमार ये सुकोमल गात
हर नया ख़ाना नई घात लिएवो मगर बचता रहा
हर एक मंज़िल जो रह गई हैफ़क़त गुज़रता हुआ फ़साना
रात की नारी डूब गई हैसुब्ह की देवी जाग चुकी है
कुछ तार तम्बूरों के झनके, कुछ ढमढी और मुँह-चंग बजीकुछ घुँगरू खटके झम-झम-झम कुछ गत गत पर आहंग बजी
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