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नज़्म
मेरा दिल ग़म-गीं है तो क्या
ग़म-गीं ये दुनिया है सारी
ये दुख तेरा है न मेरा
हम सब की जागीर है पियारी
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
अफ़्लाक पे जब ये लाखों तारे जगमग जगमग करती हैं
जब तारे गिन गिन कर दिल वाले ठंडी साँसें भरते हैं