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नज़्म
तुम से क़ुव्वत ले कर अब मैं तुम को राह दिखाऊँगा
तुम परचम लहराना साथी मैं बरबत पर गाऊँगा
साहिर लुधियानवी
नज़्म
सय्यद ज़मीर जाफ़री
नज़्म
तू ने तो मुझ को देखा है
मैं वो गूँगा चाँद हूँ जिस से तू ने हमेशा अपने दिल की बात कही है
राही मासूम रज़ा
नज़्म
रख तो ली बात तिरी अब न कभी बोलूँगा
अब तसव्वुर में कभी तुझ को न मैं घोलूँगा
विनोद कुमार त्रिपाठी बशर
नज़्म
टिकियाँ ये आलूओं की इस पर मज़े के छोले
लज़्ज़त जो उन की पाए गूँगा ज़बान खोले