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नज़्म
है डर कैसा तुम्हारे हम-सफ़र जब अहल-ए-फ़न भी हैं
तुम्हारे साथ शा'इर भी हैं और इन में 'चमन' भी हैं
चमन सीतापुरी
नज़्म
मेरी तख़्ईल में है एक जहान-ए-बेदार
दस्तरस में मिरी नज़्ज़ारा-ए-गुल-हा-ए-चमन
ख़लील-उर-रहमान आज़मी
नज़्म
क़ुमरियाँ मीठे सुरों के साज़ ले कर आ गईं
बुलबुलें मिल-जुल के आज़ादी के गुन गाने लगीं
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
सेहन-ए-चमन पर भौउँरों के बादल एक ही पल को छाएँगे
फिर न वो जा कर लौट सकेंगे फिर न वो जा कर आएँगे
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
अमजद नजमी
नज़्म
ख़्वाब-ए-गिराँ से ग़ुंचों की आँखें न खुल सकीं
गो शाख़-ए-गुल से नग़्मा बराबर उठा किया
आल-ए-अहमद सुरूर
नज़्म
वो मौसम है कि ख़ूबान-ए-चमन बनते-सँवरते हैं
ये आलम है कि जैसे रंग तस्वीरों में भरते हैं
नज़्म तबातबाई
नज़्म
ऐ गुल-ए-नाज़ुक-अदा, ऐ ख़ंदा-ए-सुब्ह-ए-चमन
चूमती है तेरे होंटों को नसीम-ए-मुश्क-ए-तन