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नज़्म
क़ुमरियाँ मीठे सुरों के साज़ ले कर आ गईं
बुलबुलें मिल-जुल के आज़ादी के गुन गाने लगीं
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
ख़्वाब-ए-गिराँ से ग़ुंचों की आँखें न खुल सकीं
गो शाख़-ए-गुल से नग़्मा बराबर उठा किया
आल-ए-अहमद सुरूर
नज़्म
ख़ुश हूँ फ़िराक़-ए-क़ामत-ओ-रुख़्सार-ए-यार से
सर्व-ओ-गुल-ओ-समन से नज़र को सताएँ हम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
इश्क़ नज़्ज़ारा-ओ-दीदार से आगे की है बात
इश्क़ चश्म-ओ-लब-ओ-रुख़सार से आगे की है बात
अनवार अब्बास
नज़्म
इशरतें ख़्वाबीदा रंग-ए-ग़ाज़ा-ए-रुख़सार में
सुर्ख़ होंटों पर तबस्सुम की ज़ियाएँ जिस तरह
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
देस परदेस के यारान-ए-क़दह-ख़्वार के नाम
हुस्न-ए-आफ़ाक़, जमाल-ए-लब-ओ-रुख़्सार के नाम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
साज़-ए-फ़ितरत पे ग़ज़ल-ख़्वाँ है शुऊ'र-ए-तन्क़ीद
काग़ज़ी काकुल-ओ-रुख़्सार कहाँ से लाऊँ