आपकी खोज से संबंधित
परिणाम "haa.il"
नज़्म के संबंधित परिणाम "haa.il"
नज़्म
लहद में सो रही है आज बे-शक मुश्त-ए-ख़ाक उस की
मगर गर्म-ए-अमल है जागती है जान-ए-पाक उस की
हफ़ीज़ जालंधरी
नज़्म
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
नज़्म
अगर कोह-ए-गिराँ भी होगा अपनी राह में हाइल
उसे भी पाएमाल-ए-अज़्म-ओ-हिम्मत कर के छोड़ेंगे
अहमक़ फफूँदवी
नज़्म
यूँही इक ग़ैर-शुऊरी सी ख़ुशुनत का ख़रोश
बे-इरादा है तो क्या ग़ैर-शुऊरी है तो क्या