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नज़्म
वो जिन की फ़िक्र में रहती थी मैं 'वफ़ा' बेचैन
ग़म-ओ-ख़ुशी के मिरे तर्जुमान हो गए हैं
अमतुल हई वफ़ा
नज़्म
हम हैं सीमाब-सिफ़त हक़्क़-ओ-सदाक़त की नवीद
मा'बद-ए-ज़ुल्म में नेकी के सनम ढलते हैं
नूर-ए-शमा नूर
नज़्म
ऐ वफ़ा खुलते हैं तुझ पर आज क्या क्या राज़ देख
चल चमन में बुलबुल-ओ-गुल के नियाज़-ओ-नाज़ देख
मेला राम वफ़ा
नज़्म
फ़र्ज़ करो हम अहल-ए-वफ़ा हों, फ़र्ज़ करो दीवाने हों
फ़र्ज़ करो ये दोनों बातें झूटी हों अफ़्साने हों
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
लब पर नाम किसी का भी हो, दिल में तेरा नक़्शा है
ऐ तस्वीर बनाने वाली जब से तुझ को देखा है
इब्न-ए-इंशा
नज़्म
लाला-ओ-गुल क्या चमन भी तेरे क़दमों पर निसार
ये गुहर-हा-ए-सुख़न भी तेरे क़दमों पर निसार
असरार-उल-हक़ मजाज़
नज़्म
सोचते थे कि हो ना-वाक़िफ़-ए-आदाब-ए-वफ़ा
तुम में तो तर्क-ए-तअ'ल्लुक़ का सलीक़ा भी नहीं
नसीम सय्यद
नज़्म
ख़ुद अपने चारागर से हाल-ए-सई-ए-रायगाँ कहूँ
कहूँ कि क्यूँ फ़सुर्दगी है ख़ेमा-ज़न बहार में
शाहिद मलिक
नज़्म
आमिर उस्मानी
नज़्म
अभी जो ख़िर्मन-ए-अहल-ए-वफ़ा पे गिरती हैं
चराग़-ए-राह बनेंगी वो बिजलियाँ इक दिन
मसूद अख़्तर जमाल
नज़्म
सच है असरार-ए-हक़ीक़त का ख़ज़ाना तू है
हाल-ओ-मुस्तक़बिल-ओ-माज़ी का ज़माना तू है