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नज़्म
चमकते हुए सब बुतों को मिटा दो
कि अब लौह-ए-दिल से हर इक नक़्श हर्फ़-ए-ग़लत की तरह मिट चुका है
फ़ख़्र-ए-आलम नोमानी
नज़्म
हम हैं सीमाब-सिफ़त हक़्क़-ओ-सदाक़त की नवीद
मा'बद-ए-ज़ुल्म में नेकी के सनम ढलते हैं
नूर-ए-शमा नूर
नज़्म
लेकिन इस दिन के लिए ऐ हम-नशीनो दोस्तो
कैसी कैसी बे-बहा क़ुर्बानियाँ देना पड़ीं
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
यही वो मंज़िल-ए-मक़्सूद है कि जिस के लिए
बड़े ही अज़्म से अपने सफ़र पे निकले थे
सय्यदा शान-ए-मेराज
नज़्म
मुझे तेरे तसव्वुर से ख़ुशी महसूस होती है
दिल-ए-मुर्दा में भी कुछ ज़िंदगी महसूस होती है
कँवल एम ए
नज़्म
यूँ फ़ज़ाओं में रवाँ है ये सदा-ए-दिल-नशीं
ज़ेहन-ए-शाइर में हो जैसे इक अछूता सा ख़याल