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नज़्म
फिर लहू बहने लगा आँखों से क्या फिर छिड़ गया
हल्क़ा-ए-अहबाब में ज़िक्र-ए-विसाल-ए-'आरज़ू'
मासूम शर्क़ी
नज़्म
हम तिरे सब से बड़े हल्क़ा-ए-अहबाब में हैं
फिर भी तूफ़ाँ से निकलते नहीं गिर्दाब में हैं
खालिद इरफ़ान
नज़्म
हल्क़ा-ए-ज़ुल्फ़-ए-सनम की तीरगी से दूर हूँ
ज़िंदगी के पेच-ओ-ख़म सुलझा रहा हूँ आज-कल
मासूम शर्क़ी
नज़्म
ख़ुद ज़ाहिद-ए-सद-साला गिरफ़्तार है जिस में
वो हल्क़ा-ए-तज़वीर-ओ-फ़ुसूँ-ज़ार है आलम
बेबाक भोजपुरी
नज़्म
अपनी नींदों में तिरे ख़्वाब कहाँ से लाऊँ
फ़ुर्सत-ए-ख़ातिर-ए-अहबाब कहाँ से लाऊँ
इफ़्फ़त ज़ेबा काकोरवी
नज़्म
वर्ना 'ग़ालिब' की ज़बाँ में मिरे हमदम मिरे दोस्त
दाम हर मौज में है हल्क़ा-ए-सद-काम-ए-नहंग
साहिर लुधियानवी
नज़्म
क़ुर्बानी ऐसे हाल में अम्र-ए-मुहाल है
बकरा ''तमाम हल्क़ा-ए-दाम-ए-ख़याल है''
सय्यद मोहम्मद जाफ़री
नज़्म
नूर-ए-फ़ितरत ज़ुल्मत-ए-पैकर का ज़िंदानी नहीं
तंग ऐसा हल्क़ा-ए-अफ़कार-ए-इंसानी नहीं