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नज़्म
देखिए देते हैं किस किस को सदा मेरे बाद
'कौन होता है हरीफ़-ए-मय-ए-मर्द-अफ़गन-ए-इश्क़'
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नज़्म
वो लब जो हर्फ़-ए-सर-ए-दार का मुग़न्नी था
जो नग़्मा-ख़्वाँ सर-ए-मक़्तल रहा उजालों का
मुस्लिम शमीम
नज़्म
ब-फ़ैज़-ए-सोज़-ए-ख़ुदी तेरी ज़ीस्त की रातें
हरीफ़-ए-सुब्ह-ए-ज़र-अफ़्शाँ नहीं तो कुछ भी नहीं
अफ़सर सीमाबी अहमद नगरी
नज़्म
नर्म-रफ़्तारी हो वक़्त-ए-सैर-ए-गुलज़ार-ए-तरब
राह-ए-पुर-ख़ार-ए-अमल में गर्म-रफ़्तारी भी हो
अर्श मलसियानी
नज़्म
बाहें फैलाए हुए रास्ता रोके है खड़ा
कौन होता है हरीफ़-ए-मय-ए-मर्द अफ़गन-ए-इश्क़
मोहम्मद दीन तासीर
नज़्म
कौन होता है हरीफ़-ए-मय-ए-मर्द-अफ़्गन-ए-इल्म
किस के सर जाएगा अब बार-ए-गिरान-ए-उर्दू
मसऊद हुसैन ख़ां
नज़्म
ग़ैरत-ए-मुख़्लिस हलाक-ए-जज़्बा-ए-पिंदार हो
ऐ हरीफ़-ए-ज़ेहन-ओ-दिल बेदार हो बेदार हो
नख़्शब जार्चवि
नज़्म
न सामान-ए-ऐश-ओ-तरब न हूर-ओ-क़ुसूर माँगूँगा
न रुस्वाई से बचने की न इज़्ज़त आबरू की ख़्वाहिश है
अबु बक्र अब्बाद
नज़्म
तिश्नगी में चंद क़तरों पर क़नाअत किस लिए
दामन-ए-हिम्मत हरीफ़-ए-जोश-ए-दरिया क्यों न हो