aaj ik aur baras biit gayā us ke baġhair
jis ke hote hue hote the zamāne mere
परिणाम "hilaa"
कोई इन को एहसास-ए-ज़िल्लत दिला देकोई इन की सोई हुई दुम हिला दे
उठ्ठो मिरी दुनिया के ग़रीबों को जगा दोकाख़-ए-उमरा के दर ओ दीवार हिला दो
ऐ कि तुझ को खा गया सर्माया-दार-ए-हीला-गरशाख़-ए-आहू पर रही सदियों तलक तेरी बरात
गाह ब-हीला मी-बरद, गाह ब-ज़ोर मी-कशदइश्क़ की इब्तिदा अजब इश्क़ की इंतिहा अजब!
लड़की सर को झुकाए बैठीकाफ़ी के प्याले में चमचा हिला रही है
हर सुब्ह हिला देता था ज़ंजीर ज़मानाक्यूँ आज दिवाने को जगाता नहीं कोई
मिरे हम-सफ़ीर थे हीला-जूकिसी और सम्त निकल गए
हम अर्ज़-ओ-समा को हिला देंगेमज़दूर हैं हम मज़दूर हैं हम
ऐ हीला-गरान-ए-शहर-ए-शीरींआया हूँ पहाड़ काट कर मैं
सद हज़ार बातें थींहीला-ए-शकेबाई
हीला-ए-शकेबाईसूरतों की ज़ेबाई
दस्त-ए-शफ़क़त है बड़ी उम्र की महबूबा काऔर मिरे शानों को इस तरह हिला जाता है
पाबंद-ए-वफ़ा हो तो दिल-ओ-जान लुटा देआ जाए बग़ावत पे तो दुनिया को हिला दे
आदमी किस से मगर बात करे?बात जब हीला-ए-तक़रीब-ए-मुलाक़ात न हो
ये जी चाहता है कि तुम एक नन्ही सी लड़की हो और हम तुम्हें गोद में ले के अपनी बिठा लेंयूँही चीख़ो चिल्लाओ हँस दो यूँही हाथ उठाओ हवा में हिलाओ हिला कर गिरा दो
ये सच है तो फिर क्यूँकोई ऐसी सूरत, कोई ऐसा हीला न था
क्या क्या गले लगावेंगे दिल-बर को शाद होसो तू वो आज भी न मिला शोख़-ए-हीला-जू
आज उस क़स्र की ज़ंजीर हिला दी हम नेआग, काग़ज़ के चमकते हुए सीने पे बढ़ी
सो मैं ने साए बिछा दिए थेतमाम झूले हिला दिए थे
इल्हाद कर रहा है मुरत्तब जहान-ए-नौदैर-ओ-हरम के हीला-ए-ग़ारत-गरी की ख़ैर
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