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नज़्म
पस्ती में पा-ब-गिल है उम्र-ए-रवाँ का दरिया
फिर ऊँची वादियों के मंज़र उसे दिखा दे
ख़ुशी मोहम्मद नाज़िर
नज़्म
क़ाज़ी गुलाम मोहम्मद
नज़्म
बू-ए-गुल सामने हाज़िर है लिए 'इत्र-ए-‘उरूस
रौशनी चाँद की है और है फूलों का जुलूस
चकबस्त बृज नारायण
नज़्म
इत्र-ओ-अंबर से हवा है किस क़दर महकी हुई
ख़ुशनुमा महताबियों से है फ़ज़ा दहकी हुई
मोहम्मद सिद्दीक़ मुस्लिम
नज़्म
ऐ 'सुहैल' उस को ज़रा खुल कर बरसना चाहिए
एहतियात-ए-हुस्न-ए-दिल दिल बार है बरसात में
सुहैल काकोरवी
नज़्म
ख़्वाब-दर-ख़्वाब जलें लज़्ज़त-ए-इम्काँ के चराग़
और मिल जाएँ सभी तिश्ना सवालों के जवाब
सुहेल अहमद
नज़्म
ग़ुंचों पे अजब शादाबी है और जाग उठी है हरियाली
तम्हीद बहार-ए-ताज़ा का दीदार ये पहली बारिश है
सुहैल काकोरवी
नज़्म
वो कौन, कैसा, किस लिए, कहाँ पे, कब से, कब तलक?
सवाल-ए-शश-जहात का जवाब कोई अब तलक?