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नज़्म
अभी तो नेकियों के सींच कर नख़्ल-ए-तर-ओ-ताज़ा
अभी सहन-ए-स'आदत में लगाने की ज़रूरत थी
ऐश शुजाबादी
नज़्म
तेरे नुमूद पर करे फ़ख़्र हर एक बा-कमाल
इज़्ज़त-ए-क़ौम का है जुज़ इज़्ज़त-ए-नफ़्स का सवाल
अली मंज़ूर हैदराबादी
नज़्म
उस ने अपने पिंदार की किर्चियाँ समेट कर दराज़ में रक्खीं
इज़्ज़त-ए-नफ़्स के टुकड़े अलमारी में छुपाए
हमीदा शाहीन
नज़्म
कई मर्तबा इज़्ज़त-ए-नफ़्स को ताक़ पर रख के सॉरी भी कहना पड़ा है तुम्हारी वज्ह से
तो ये भी तो सच है
शहनाज़ परवीन शाज़ी
नज़्म
इज़्ज़त-ए-क़ौमी तरसती थी सदा आँखें में
आ के बलदा के सिवा न में लगा उस का पता
अल्ताफ़ हुसैन हाली
नज़्म
इज़्ज़त-ए-अज्दाद के सर पर दमा-दम ठोकरें
रिश्ता-ए-आवाज़ पर लफ़्ज़ों की पैहम ठोकरें