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नज़्म
अफ़यूँ का दौर भी है मय-ए-अर्ग़वाँ के बाद
जाम-ए-सिफ़ाल हाथ में है जाम-ए-जम के साथ
इस्मतुल्लाह इस्मत बेग
नज़्म
हो अगर हाथों में तेरे ख़ामा-ए-मोजिज़ रक़म
शीशा-ए-दिल हो अगर तेरा मिसाल-ए-जाम-ए-जम
अल्लामा इक़बाल
नज़्म
पुतलियाँ दोनों तिरी आँखों में दो नीलम लगे
और तिरी आँखों का पानी मुझ को जाम-ए-जम लगे
जय राज सिंह झाला
नज़्म
तिरे दीवाँ को जाम-ए-जम समझते हैं जहाँ वाले
कहीं आँसू कहीं नग़्मे कहीं जल्वे जवानी के
बिर्ज लाल रअना
नज़्म
मुजस्सम शौकत-ए-दौराँ सरापा जाम-ए-जम भी हैं
जलाल-ए-बर्क़ भी हैं ज़ालिमों के वास्ते लेकिन
मसूद अख़्तर जमाल
नज़्म
ये कार-ज़ार-ए-हस्ती है रंज-ओ-ग़म की बस्ती
फिर याद-ए-बज़्म-ए-जम में इक जाम-ए-जम पिला दे
ख़ुशी मोहम्मद नाज़िर
नज़्म
लबरेज़ है शराब-ए-हक़ीक़त से जाम-ए-हिंद
सब फ़लसफ़ी हैं ख़ित्ता-ए-मग़रिब के राम-ए-हिंद